शिलांग , फरवरी 16 -- मेघालय के राज्यपाल चंद्रशेखर एच विजयशंकर ने कहा है कि मेघालय कोविड महामारी के बाद लगातार तीन वर्ष तक औसतन 10 प्रतिशत की वृद्धि दर बनाये रखने वाला अकेला राज्य है।

श्री विजयशंकर ने सोमवार को बजट सत्र के पहले दिन राज्य विधानसभा में पारंपरिक भाषण में सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों के बारे में बताते हुए कहा, "सिर्फ सात वर्षों में हमारी अर्थव्यवस्था 29,508 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग दोगुनी 59,626 करोड़ रुपये हो गयी है, जो हमारे लोगों की हिम्मत और क्षमता का सबूत है।"उन्होंने विधानसभा को यह भी सूचित किया कि तमिलनाडु के बाद मेघालय अब भारत में दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता राज्य बन गया है, जिसने 2024-25 में 9.66 प्रतिशत की प्रभावशाली वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने उल्लेख किया कि सरकार मेघालय को एक ऐसे राज्य के रूप में देखती है, जो 'बेहतर सेवा वितरण, टिकाऊ बुनियादी ढांचे के निर्माण और सभी नागरिकों के लिए अवसरों के साथ राज्य को बेहतर बनाने' के वादे को वास्तव में पूरा करता है।

श्री विजयशंकर ने कहा कि दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य ने 'मेघालय एक्सीलेंस फ्रेमवर्क' विकसित किया है। यह एक रणनीतिक योजना है, जिसका लक्ष्य 2032 तक प्रति व्यक्ति आय और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के मामले में भारत के शीर्ष 10 राज्यों में शामिल होना है।

राज्यपाल ने बताया कि सरकार कृषि, सड़क, बिजली, जलापूर्ति, निवेश प्रोत्साहन, आईटी एवं संचार और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों को मजबूत कर रही है, जो राज्य की आर्थिक वृद्धि के लिए मुख्य उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आजीविका सृजन, सामाजिक सुरक्षा और नागरिक केंद्रित शासन में किये जा रहे लक्षित समाधान हर नागरिक का समग्र कल्याण सुनिश्चित कर रहे हैं। राज्यपाल के अनुसार, सरकार आर्थिक विकास को गति देने और सभी नागरिकों के लिए रोजगार पैदा करने हेतु 'सार्वजनिक निजी भागीदारी' (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने सूचित किया कि राज्य की पहलों ने अब तक 1,800 करोड़ रुपये से अधिक के निजी निवेश को प्रेरित किया है और 2032 तक 8,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने तथा 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। 'मेघालय को बेहतर राज्य' बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए श्री विजयशंकर ने कहा कि सरकार वर्तमान में बहुपक्षीय विकास एजेंसियों से समर्थित सड़क, बिजली, कृषि, जल संरक्षण और पर्यटन सहित प्रमुख क्षेत्रों में कई 'बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएं' (ईएपी) लागू कर रही है।

राज्यपाल ने बताया कि मेघालय में ऐसी 15 परियोजनाएं चल रही हैं, जबकि दो अतिरिक्त परियोजनाओं के लिए ऋण समझौता बातचीत के स्तर पर है, जिनका कुल मूल्य 12,166 करोड़ रुपये है। उन्होंने यह भी कहा कि ये परियोजनाएं मेघालय में बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए एक बहुत बड़ा लाभ हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इन परियोजनाओं के तहत मिलने वाली धनराशि का 72 प्रतिशत केंद्र सरकार बतौर अनुदान देती है। शेष राशि का योगदान राज्य सरकार का होता है।

श्री विजय शंकर ने यह भी सूचित किया कि राज्य भर में पर्यटन, जलापूर्ति और यातायात परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के जरिये उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (डीओएनईआर) से मुख्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए सहायता प्राप्त कर रही है।

राज्यपाल ने विधानसभा को यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने अपने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में जलवायु लचीलेपन और पर्यावरण संरक्षण के लिए मेघालय के 'समुदाय-संचालित विकास मॉडल' की सराहना की है। उन्होंने कहा, "यह मॉडल दिखाता है कि कैसे जमीनी स्तर की भागीदारी 'मेग-एराइज', झरनों की मैपिंग और जलवायु-अनुकूल सामुदायिक जल संचयन जैसी बड़े पैमाने की पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित जल सुरक्षा पहलों के माध्यम से सतत प्रगति को बढ़ावा दे रही है।"मेघालय ने 55,000 से अधिक झरनों की मैपिंग की है और 8,430 हेक्टेयर क्षेत्र में 500 से अधिक सामुदायिक जल समाधान लागू किया हैं। इससे दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्थिरता में काफी वृद्धि हुई है।

राज्य भर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देकर सभी नागरिकों के लिए अवसर सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए श्री विजयशंकर ने कहा कि मेघालय नये फैक्ट्री क्लस्टर, एक मेगा फूड पार्क और शैक्षणिक बुनियादी ढांचे के सहयोग से व्यापार संवर्धन को बढ़ाकर अपने औद्योगिक आधार का विस्तार कर रहा है।

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