शिलांग , दिसंबर 04 -- मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने कहा है कि मेघालय दिव्यांग लोगों के कल्याण को अपनी नीतियों और शासन के दृष्टिकोण में समाहित करने वाला पूर्वोत्तर का पहला राज्य बन गया है।
श्री संगमा ने यहाँ यू सोसो थाम सभागार में अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगता दिवस के दौरान कहा, "हमने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम को पूरी तरह से लागू कर दिया है। इसके साथ ही दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए राज्य नीति भी तैयार की है।"मुख्यमंत्री ने कई दिव्यांगजनों की सराहना की, जो सभी बाधाओं के बावजूद आगे बढ़े हैं और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग आशा एवं प्रेरणा के प्रतीक हैं।
श्री संगमा ने कहा, "हमारा राज्यव्यापी समुदाय-आधारित पुनर्वास नेटवर्क सभी जिलों और 46 ब्लॉकों तक है, जिसमें 70 प्रतिशत से अधिक विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी) कवरेज है और 32,000 दिव्यांगजनों के पास पहचान पत्र हैं।" उन्होंने कहा कि 58 योग्यता-आधारित छात्रवृत्तियाँ प्रतिवर्ष प्रदान की जाती हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जिला संसाधन केंद्र फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, ऑडियोलॉजी और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रदान कर राज्य के जनकल्याण दृष्टिकोण को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 41 सरकारी इमारतों को दिव्यांगजनों के लिए पूरी तरह से सुलभ बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, 84 सरकारी वेबसाइट भी उनके उपयोग के अनुकूल हैं।
श्री संगमा ने कहा कि मेघालय का ध्यान अब 'दान से अधिकारों की ओर, दया से गरिमा की ओर और लेबल से क्षमताओं की ओर' हो गया है। उन्होंने जोर दिया कि किसी समाज की प्रगति को इस तरह नहीं मापा जा सकता है कि वह मजबूत लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है, बल्कि यह है कि वह उन लोगों को कैसे ऊपर उठाता है जो चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, "'मेघालय ग्रासरूट्स म्यूजिक प्रोजेक्ट' के माध्यम से, हमने दिव्यांग संगीतकारों का एक 'ईस्टर्न ब्रुक बैंड' बनाया, जो अब हमारे राज्य की कहानी दुनिया तक पहुँचाते हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष की शुरुआत में एक दिव्यांगता गीत (इकोज़ ऑफ यूनिटी) जारी किया गया था।
श्री संगमा ने बताया कि दिव्यांगजनों द्वारा संचालित एक 'कॉमन सर्विस सेंटर' स्थापित किया गया है और 30 दिव्यांग उद्यमियों की पहचान कर उनमें से आठ को अब तक प्रत्येक को 2.5 लाख रूपये की राशि दी गयी है।
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