शिलांग , दिसंबर 14 -- मेघालय में महिलाएं कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) के क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं और देश में अपशिष्ट निपटान में बदलाव लाने के नये मानक बना रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल है ईंस्केम स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), जिसे "मार्टेन की मेरी मेडेंस" के नाम से जाना जाता है। यह समूह मेघालय में कचरा बीनने वालों से एक सफल उद्यम में बदल गया है।

नवंबर 2014 में बना 'मेरी मेडेंस' समूह पहले शहर के बाहरी इलाके में मार्टेन लैंडफिल में कचरा बीनने वाली महिलाओं के समूह के रूप में शुरू हुआ था। अब यह समूह बायोडिग्रेडेबल कचरे को प्रमाणित खाद में बदलने का काम करता है। इससे टिकाऊ आजीविका और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है। ईंस्केम एसएचजी अब पारंपरिक और स्वदेशी तकनीकों के इस्तेमाल से प्रमाणित खाद बनाता है, जिससे जैविक कचरा, एक मूल्यवान संसाधन में बदल जाता है।

एक आधिकारिक बयान में रविवार को कहा गया, "ईंस्केम एसएचजी की सफलता शहरी मामलों के विभाग से लगातार प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता से जुड़ी हुई है। क्षमता निर्माण और संस्थागत समर्थन के माध्यम से, इन महिलाओं ने एक चुनौतीपूर्ण और अक्सर कलंकित माने जाने वाले पेशे को एक संरचित, गरिमापूर्ण और टिकाऊ आजीविका में बदल दिया है।"बयान के अनुसार, "उनका काम लैंडफिल का बोझ कम कर रहा है, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार कर रहा है, और आसपास के समुदायों में जिम्मेदार अपशिष्ट पृथक्करण को बढ़ावा दे रहा है। पर्यावरण लाभों से परे, इस समूह ने स्थानीय हरित अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, जो समुदाय-संचालित समाधानों की सामाजिक-आर्थिक क्षमता को प्रदर्शित करता है।""शिलांग की मेरी मेडेंस" अब उन गाँवों और कस्बों की कॉलोनियों के लिए एक अनुकूलनीय मॉडल बन गई हैं जहाँ विकेन्द्रीकृत कचरा प्रबंधन को लागू किया जा सकता है।

यह समूह अब इस बात का एक शक्तिशाली मॉडल बन गया है कि कैसे राज्य के समाधान द्वारा समर्थित महिला-नेतृत्व वाले जमीनी प्रयास, मेघालय में समावेशी और टिकाऊ विकास को आगे बढ़ाते हुए अपशिष्ट प्रबंधन चुनौतियों के लिए दीर्घकालिक समाधान प्रदान कर सकते हैं।

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