शिलांग , फरवरी 09 -- मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने पूर्वी जैंतिया हिल्स जिले के माइनसंगत-थांग्सको क्षेत्र में 5 फरवरी को हुई अवैध कोयला खदान त्रासदी की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
एक अन्य घटनाक्रम में पूर्वी जैंतिया हिल्स के जिला मजिस्ट्रेट मनीष कुमार और जिला पुलिस अधीक्षक विकास कुमार इस मामले में मेघालय हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष पेश हुए। न्यायमूर्ति वानलुरा डिएंगदोह और न्यायमूर्ति हमारसन सिंह थांगखियू की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने कहा, "मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस पर अभी टिप्पणी नहीं की जा सकती। जांच कानूनी ढांचे के भीतर आगे बढ़ रही है।" उन्होंने बताया कि कुछ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की गई है।
इस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। शनिवार को घटनास्थल से दो और शव बरामद किए गए थे।
सोमवार सुबह राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और विशेष बचाव दलों ने राहत एवं बचाव अभियान फिर से शुरू किया। आशंका है कि लगभग 100 फीट गहरी 'रैट-होल' कोयला खदान में अभी भी कुछ मजदूर फंसे हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री संगमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि सरकार ने आयोग अधिनियम के तहत एक न्यायिक जांच आयोग गठित करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि आयोग घटना की पूरी क्रमवार जांच करेगा, चूक की पहचान करेगा और जिम्मेदारी तय करेगा। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं और क्या अवैध खनन गतिविधि इसमें शामिल थी। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए नीतिगत कदम उठाए जाएंगे।
पुलिस अवैध खदान के एक मालिक अर्नेस्ट स्वेर और पर्यवेक्षक मिथुन की तलाश में छापेमारी कर रही है। विस्फोट के तुरंत बाद दोनों फरार हो गए थे। अधिकारियों के अनुसार, इनकी गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि डायनामाइट से मीथेन गैस पॉकेट में विस्फोट कैसे हुआ और घटना के दिन खदान में कितने मजदूर अंदर गए थे।
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