श्रीगंगानगर , दिसम्बर 05 -- राजस्थान में बीकानेर के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद और केंद्रीय कानून राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल शुक्रवार को श्रीगंगानगर में गंगनहर के शिलान्यास की शताब्दी समारोह के दौरान आयोजित जनसभा में अपने गायन और गीत प्रेम को छुपा नहीं पाए।

इस अवसर पर श्री मेघवाल ने गंगनहर का निर्माण करवाने वाले बीकानेर रियासत के तत्कालीन महाराजा गंगासिंह की गाथा सुनाते हुए मशहूर गीत-सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था, आज भी है और कल भी रहेगा' की पंक्तियां गुनगुनाईं। इस दौरान उन्होंने मंच पर मौजूद राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इजाजत लेकर यह गीत गाया और मजाक में कहा कि मुख्यमंत्री अक्सर उनको कहते हैं कि उन्हें ऐसे मौकों पर कोई न कोई गीत सुनने को मिल ही जाता है।

उल्लेखनीय है कि अर्जुनराम मेघवाल एक कुशल गायक हैं और विशेष रूप से भजन गायन में महारत रखते हैं।

समारोह में उन्होंने गंग नहर के निर्माण के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को विस्तार से बताया जिसमें काशी हिंदू विश्वविद्यालय (तब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) के पूर्व कुलपति पंडित मदनमोहन मालवीय का महत्वपूर्ण योगदान शामिल था। मेघवाल ने कहा कि बीकानेर रियासत में 1899-1900 के दौरान पड़े भयानक अकाल, जिसे 'छपनिया अकाल' के नाम से जाना जाता है, ने महाराजा गंगासिंह को गहराई से प्रभावित किया। इस अकाल का जिक्र राजस्थान के लोकगीतों में अब भी होता है।

श्री मेघवाल ने आगे बताया कि महाराजा गंगासिंह उस समय पंडित मदनमोहन मालवीय से मिले, जो काशी विश्वविद्यालय के कुलपति थे। महाराजा अपनी रियासत में एक बड़े शिक्षण संस्थान जैसे विश्वविद्यालय की स्थापना के उद्देश्य से गए थे, लेकिन जब उन्होंने अकाल की भयावहता का जिक्र किया, तो पंडित मालवीय ने सलाह दी कि विश्वविद्यालय बाद में स्थापित हो जाएगा, पहले अपनी प्रजा के लिए पीने के पानी और सिंचाई की समस्या का समाधान करें। इस सलाह से प्रेरित होकर महाराजा ने ब्रिटिश शासन से जल योजना की अनुमति मांगी, लेकिन शुरुआत में उन्हें सफलता नहीं मिली।

इसी बीच प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) शुरू हो गया। महाराजा गंगासिंह ने ब्रिटिश सेना की ओर से महत्वपूर्ण योगदान दिया। युद्ध समाप्ति के बाद 1919 में हुई विश्व प्रसिद्ध वर्साय संधि पर ब्रिटिश पक्ष की ओर से दो व्यक्तियों ने हस्ताक्षर किए, जिनमें से एक महाराजा गंगासिंह थे। इस योगदान के बदले महाराजा को उम्मीद थी कि ब्रिटिश सरकार अब उनकी जल योजना को मंजूरी देगी। हालांकि, बहावलपुर रियासत (अब पाकिस्तान में) के शामिल होने से मामला जटिल हो गया। महाराजा ने बहावलपुर के शासकों को भी मनाया और योजना को आगे बढ़ाया।

मेघवाल के अनुसार योजना को अंतिम रूप देने से पहले महाराजा ने फिर पंडित मालवीय से सलाह ली। पंडित जी ने सुझाव दिया कि विशेषज्ञ इंजीनियरों से जल योजना का विस्तृत खाका तैयार करके ब्रिटिश सरकार के पास जाएं। पंजाब के फिरोजपुर जिले से शुरू होने वाली गंगनहर की योजना में दो विदेशी इंजीनियरों - एडब्ल्यूई स्टैंनली और आरजी कैनेडी का बड़ा योगदान रहा। आखिरकार, ब्रिटिश सरकार से अनुमति मिली और पांच दिसम्बर 1925 को पंजाब में नहर का शिलान्यास किया गया। इसकी अनुमानित लागत उस समय करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये थी। दो वर्ष बाद 26 अक्टूबर 1927 को नहर में पानी छोड़ा गया, जिसने बीकानेर रियासत के सूखे इलाकों को हरा-भरा बना दिया।

समारोह में श्री मेघवाल ने अपना व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि 1990-92 में जब वह श्रीगंगानगर जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक के रूप में कार्यरत थे, तो एक बार सरकारी गाड़ी से अनूपगढ़ के पास लूणिया गांव के एक एक किसान को महाराजा गंगासिंह की प्रतिमा के सामने जूते उतारकर दंडवत प्रणाम करते देखा। पूछने पर किसान ने कहा कि अगर महाराजा ने गंग नहर नहीं बनवाई होती, तो उनके खेत वर्तमान में इतने हरे-भरे न होते। श्री मेघवाल ने कहा कि महाराजा गंगासिंह का यह कार्य इतना महान है कि वह अमर हो गए हैं। इसी भावना से उन्हें फिल्मी गीत-सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था...याद आया, जो महाराजा के योगदान की अमरता को दर्शाता है। आने वाले सौ सालों तक लोग उन्हें याद रखेंगे।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी अपने उद्बोधन में श्री मेघवाल के गीत गायन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर महाराजा गंगासिंह ने यह बड़ा कार्य न किया होता, तो वर्तमान में यह इलाका 'अन्न का कटोरा' न कहलाता। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने अपने उद्बोधन में कहा कि छपनिया अकाल में करीब पांच लाख लोगों की मौत हो गई थी।

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