पलक्कड़ , जनवरी 20 -- केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने कहा है कि शिक्षा सिर्फ़ आधुनिक तकनीकी ज्ञान देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि एक ज़िम्मेदार और जागरूक समाज बनाने के लिए विद्यार्थियों में भारत की प्राचीन ज्ञान, सांस्कृतिक मूल्यों और सभ्यता की जागरूकता पैदा करने पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।
राज्यपाल ने यहां कन्नाकिनगर में कर्णकायम्मन हायर सेकेंडरी स्कूल के हीरक जयंती समारोह का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि केवल एक समग्र और मूल्य-उन्मुख शिक्षा प्रणाली ही ऐसी पीढ़ी तैयार कर सकती है, जो सामाजिक रूप से जवाबदेह हो, राष्ट्र के प्रति समर्पित हो और वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो।
उन्होंने कहा कि परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा के साथ जोड़ना समय की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि पलक्कड़ में एक शैक्षणिक संस्थान पिछले 60 सालों से समाज के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति के रूप में काम कर रहा है, जिसका एक स्पष्ट दृष्टिकोण और मूल्यों पर आधारित एक मज़बूत नींव है। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान न केवल करियर बल्कि चरित्र और सामाजिक चेतना को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने स्कूलों की ज़िम्मेदारी पर ज़ोर देते हुए कहा कि उन्हें ऐसे छात्रों को तैयार करना चाहिए जो भारत की सांस्कृतिक नैतिकता में मज़बूती से जुड़े हों, साथ ही नवीनतम वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी कौशल से भी लैस हों। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल कक्षाओं, पाठ्यपुस्तकों या परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा, " तकनीकी दक्षता के साथ-साथ, विद्यार्थियों को हमारी प्राचीन विरासत, नैतिक सिद्धांतों और सांस्कृतिक निरंतरता की समझ विकसित करनी चाहिए। यह जागरूकता उन्हें समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास कराएगी।"उन्होंने तेज़ गति से हो रहे तकनीकी विकास का ज़िक्र करते हुए बताया कि शिक्षा को समाज की रोज़मर्रा की वास्तविकताओं के प्रति अपनी प्रासंगिकता का लगातार मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों को समय-समय पर अपने लक्ष्यों, पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धतियों का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विद्यार्थी न केवल रोज़गार के लिए बल्कि सामाजिक जीवन में सार्थक भागीदारी के लिए भी तैयार हों।
राज्यपाल ने युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के भविष्य को आकार देने में युवा पीढ़ी की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। इसलिए, शैक्षणिक संस्थानों को ऐसे स्थान के रूप में काम करना चाहिए, जहां आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक संवेदनशीलता सद्भाव से सह-अस्तित्व में रहें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को प्रगतिशील विचारों और समकालीन ज्ञान से अवगत कराया जाता है, लेकिन उन्हें परंपरा के उद्देश्यों और आदर्शों को समझने के लिए भी मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा तरीका विकास और विरासत के बीच एक अच्छा संतुलन बनाएगा, जिससे आधुनिकता की दौड़ में सांस्कृतिक जड़ों से अलगाव नहीं होगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत' के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि इस राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने की जिम्मेदारी हर नागरिक की है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को इस बारे में सोचना चाहिए कि वह देश के विकास में क्या योगदान दे सकता है, और इस प्रक्रिया में छात्रों की खास भूमिका है।
श्री अर्लेकर ने कहा, " भारत आजादी की 100वीं सालगिरह की ओर बढ़ रहा है, देश में दुनिया का मार्गदर्शन करने की ताकत और क्षमता है, बशर्ते हम ऐसी पीढ़ी तैयार करें, जिसमें मकसद की स्पष्टता, नैतिक ताकत और देश के प्रति प्रतिबद्वता हो।"उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की 100वीं सालगिरह का जिक्र करते हुए कहा कि इसे सिर्फ एक जश्न के मौके के तौर पर नहीं, बल्कि समाज के साथ गहरे जुड़ाव की यात्रा के एक पड़ाव के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरएसएस और समाज अलग-अलग नहीं हैं, और यह संगठन भारत की संस्कृति और परंपराओं को अपनाकर काम करता है।
उन्होंने कहा, " मकसद एक ऐसे मुकाम पर पहुंचना है, जहां यह स्वाभाविक रूप से स्वीकार किया जाये कि समाज और आरएसएस एक ही हैं।" राज्यपाल ने कार्यक्रम के दौरान 'दिव्यांगमित्रम' का उद्घाटन किया, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित बातचीत प्रशिक्षण समर्थित पहल है, जिसका मकसद दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए समावेशी शिक्षा और प्रभावी प्रशिक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए पहला योगदान भी दिया।
इस अवसर पर राज्यपाल को सम्मान और आभार के तौर पर स्कूल ट्रस्ट ने देवी कन्नाकी का प्रतीक एक स्मृति चिह्न- एक 'चिलंबू' (पायल) भेंट किया। यह स्मृति चिह्न औपचारिक रूप से ट्रस्ट के उपाध्यक्ष के. एस. कन्नन और कोषाध्यक्ष के. सेथुमाधवन ने भेंट किया।
राज्यपाल ने इससे पहले दिन में तिरुपुरक्कल के ऐतिहासिक कन्नाकी मंदिर का दौरा किया और स्कूल परिसर पहुंचने से पहले मंदिर गये, जहां स्कूल प्रबंधन और आयोजन समिति ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
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