हैदराबाद , अप्रैल 02 -- तेलंगाना सरकार के विरासत विभाग ने मुलुगु जिले में प्रागैतिहासिक काल के शवाधान गृहों के एक बड़े समूह की पहचान की है। गोदावरी नदी घाटी में हुई इस खोज को पुरातत्व के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोटलागुडेम गांव के निवासियों से मिली जानकारी के आधार पर, विशेष मुख्य सचिव जयेश रंजन के निर्देशों पर निदेशक आचार्य अर्जुन राव, उप निदेशक डॉ. पी. नागराजू और ओएसडी ए. राजू की एक तकनीकी टीम ने स्थल का दौरा किया। एतूरनगरम एजेंसी क्षेत्र के मोटलागुडेम और उसके आसपास स्थित इन संरचनाओं को स्थानीय भाषा में "राकासी बंडलु" (विशाल पत्थर) और "राकासी गुहालु" (विशाल गुफाएं) कहा जाता है।

अधिकारियों का कहना है कि ये निष्कर्ष शुरुआती मानव बस्तियों की उपस्थिति की पुष्टि करते हैं और उनके जीवन स्तर, रीति-रिवाजों और सामाजिक संगठन के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करते हैं।

कप्पलायी गुट्टा में लगभग 100 एकड़ में फैले इस स्थल पर बलुआ पत्थर के बड़े स्लैब से बनी 'डोलमेन' संरचनाएं मिली हैं। इनमें से प्रत्येक संरचना चार खड़े पत्थरों और उनके ऊपर रखे 10 से 20 टन वजनी विशाल पत्थरों (कैपस्टोन) से बनी है। इनके भीतर पत्थर की बनी कुछ ऐसी आकृतियां मिली हैं जो ताबूत जैसी दिखती हैं। साथ ही आसपास गोलाकार घेरे भी मिले हैं, जो एक सुनियोजित बस्ती की ओर इशारा करते हैं।

विभाग ने बताया कि डमरवई, जग्गाराम, गंगाराम, रंगपुरम और मंगलपेट मंडल के कई हिस्सों में ऐसे सैकड़ों दफन स्थल पहचाने गए हैं। हालांकि, समय के साथ प्राकृतिक क्षरण और मानवीय गतिविधियों (जैसे निर्माण कार्यों के लिए पत्थरों का इस्तेमाल) के कारण कई संरचनाएं क्षतिग्रस्त भी हुई हैं।

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