बैतूल , दिसंबर 08 -- मध्यप्रदेश में ताप्ती उद्गम की पावन नगरी मुलताई को "पवित्र नगरी" का दर्जा प्राप्त हुए एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन इस अवधि में अपेक्षित विकास कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। नगरपालिका परिषद मुलताई द्वारा विभिन्न विभागों को भेजे गए प्रस्तावों और पत्रों पर न तो कार्रवाई हुई है और न ही किसी स्तर से कोई जवाब मिला है। विभागीय उदासीनता के कारण लंबे समय से अटके इन कार्यों को लेकर स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ श्रद्धालुओं में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन विधायक और पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे ने विधानसभा में तारांकित प्रश्न क्रमांक 3086 के माध्यम से पवित्र नगरी विकास संबंधी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद 16 दिसंबर 2024 को संबंधित विभागों को कार्यवाही के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद संस्कृत विद्यालय निर्माण, भक्त निवास स्थापना, धार्मिक धरोहर संरक्षण, हरित क्षेत्र विकास और अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव अब भी फाइलों के बोझ तले दबे हुए हैं और किसी भी स्तर पर ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।

विभागीय स्तर पर संस्कृति विभाग को प्राचीन मंदिरों का सर्वेक्षण और मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि स्कूल शिक्षा विभाग को संगीत एवं संस्कृति महाविद्यालय स्थापित करने का दायित्व सौंपा गया था। इसी तरह वन एवं पर्यावरण विभाग को हरित संरक्षण और जैव-विविधता संवर्धन, राजस्व विभाग को भूमि परीक्षण एवं धार्मिक स्थलों के लिए भूमि आवंटन, तथा सामान्य प्रशासन विभाग को पुरातात्विक स्थलों का चिह्नांकन एवं पवित्र क्षेत्र विकास परिषद के गठन का कार्य सौंपा गया था। लेकिन एक वर्ष के बाद भी इन जिम्मेदारियों पर कोई दृश्यमान पहल नहीं हो सकी है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि विभागों के बीच स्पष्ट समन्वय न होने के कारण योजनाएं ठप पड़ी हैं। नागरिकों का यह भी मानना है कि पवित्र नगरी घोषित होने के बाद धार्मिक पर्यटन, बुनियादी सुविधाओं और धार्मिक स्थलों के विकास को गति मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की प्रगति न होने से लोगों की आस्था के साथ-साथ अपेक्षाएं भी प्रभावित हुई हैं।

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