श्रीनगर , जनवरी 07 -- पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के लिये आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की परिकल्पना को अपनाना है।
श्रीमती महबूबा ने बुधवार को सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस पर भी निशाना साधते हुए उस पर "सत्ता के लिए सौदेबाजी करने" का आरोप लगाया। उन्होंने पीडीपी के संस्थापक की 10वीं पुण्यतिथि पर श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके अनंतनाग के बिजबेहाड़ा में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि बीता दशक लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा है। अगर उनके पिता आज जीवित होते तो जम्मू-कश्मीर की स्थिति ऐसी नहीं होती, क्योंकि उनके पास "दूरदृष्टि और सूझबूझ" थी।
उन्होंने कहा कि उनके पिता की नीतियां लोगों के हितों की रक्षा के लिए थीं, लेकिन उनके जीवनकाल में उन्हें अक्सर गलत समझा गया। श्रीमती महबूबा ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर का मौजूदा माहौल भय से भरा हुआ है, जहां हिरासत और अनिश्चितता के कारण परिवार तबाह हो रहे हैं। उन्होंने लाल किले पर हुए आतंकवादी हमले का ज़िक्र करते हुए कहा कि एक डॉक्टर दिल्ली गया और उसने अपनी जान ले ली।
उन्होंने कहा, "कुलगाम में एक पिता ने इसलिए खुद को आग लगा ली क्योंकि उसका बेटा जेल में था। हमारे कई युवा कैद हैं, हज़ारों लोग जम्मू-कश्मीर से बाहर की जेलों में सड़ रहे हैं।"श्रीमती महबूबा ने हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में दायर अपनी जनहित याचिका (पीआईएल) का ज़िक्र करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने उनसे पूछा कि उन्हें कैद में बंद लोगों की ओर से बोलने का क्या अधिकार है। उन्होंने कहा, "अगर मैं नहीं बोलूंगी तो कौन बोलेगा? ये गरीब लोग हैं, इनके पास तो यात्रा करने के पैसे भी नहीं हैं।"उन्होंने कहा कि बंदियों के मुद्दे उठाना उनका नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का दायित्व है। उन्होंने कहा, "उनके पास 50 विधायक हैं, राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य हैं। फिर भी वे केवल पीडीपी को दोष देते हैं।"श्रीमती महबूबा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके पिता मुफ़्ती सईद ने कभी सत्ता के सौदे नहीं किए। उन्होंने कहा, "आपने हमेशा सत्ता का व्यापार किया। चाहे वह अफ़ज़ल गुरु की फांसी हो या मक़बूल भट्ट का मामला। मेरे पिता ने कश्मीर को इस दलदल से बाहर निकालने की कोशिश की, जबकि आप सौदे करते रहे। जम्मू-कश्मीर के लिए आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता मुफ़्ती मोहम्मद सईद का विज़न है। वह रास्ता जो कश्मीर को अशांति से बाहर ले जाए।"श्रीमती महबूबा ने कहा कि मुफ़्ती सईद ने जम्मू-कश्मीर को "सम्मान और गरिमा" दिलाई। उन्होंने याद दिलाया कि केवल 16 सीटें होने के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित राष्ट्रीय नेता उनसे मिलने आए थे। बाद में जब पीडीपी ने 28 सीटें जीतीं, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेता भी उनसे सलाह लेने पहुंचे।
उन्होंने कहा, "उन्होंने उनसे कहा था कि वह कश्मीर को बचाना चाहते हैं, अनुच्छेद 370 को बचाना चाहते हैं, रास्ते खोलना चाहते हैं और लोगों से तथा पाकिस्तान से बात करना चाहते हैं।"उन्होंने उमर अब्दुल्ला की आलोचना करते हुए कहा कि आज उनके पास 50 विधायक और तीन सांसद हैं, फिर भी वे दिल्ली से छोटे-मोटे तबादलों की गुहार लगाते हैं, जबकि उनके पिता(मुफ़्ती सईद) ने जम्मू-कश्मीर के लोगों की गरिमा बहाल करने की कोशिश की थी। उन्होंने पुलवामा, शोपियां और पहलगाम से होकर प्रस्तावित रेलवे लाइन परियोजना पर श्री उमर अब्दुल्ला की "चुप्पी" पर भी सवाल उठाया और कहा कि इससे उन बागानों को खतरा है जिन पर बेरोज़गार युवाओं वाले परिवार निर्भर हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित