पटना , दिसंबर 04 -- बिहार को जल संसाधन के क्षेत्र में एक नई दिशा देने के उद्देश्य से गुरूवार को राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में नार्थ कोयल जलाशय परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में जल एवं विद्युत परामर्श सेवाएँ (वाप्कोस) की अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक की उपस्थिति में परियोजना से जुड़े सभी संवेदक शामिल हुये।
मुख्य सचिव श्री अमृत ने परियोजना के संवेदकों के कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की और इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह परियोजना बिहार की प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उपस्थित सभी संवेदकों को 31 मार्च, 2026 तक का अंतिम समय देते हुए कड़े निर्देश दिए कि इस कालावधि में कुल नौ पैकेज के तहत 77.69 किलोमीटर लंबाई की महत्वपूर्ण परियोजना का कार्य हर हाल में पूर्ण हो जाना चाहिएश्री अमृत ने संवेदकों को आगाह करते हुए कहा कि दिसंबर से फरवरी तक की कड़ी ठंड कार्य में बाधा डाल सकती है, लेकिन सभी को इस चुनौती को पार करते हुए समय सीमा पर कार्य पूर्ण करने के लिए दोगुनी गति से काम करना होगा। उन्होंने परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि संवेदकों को आवश्यकतानुसार पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। कार्यों के निष्पादन में आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए, संबंधित जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, और संवेदकों का शीघ्र ही एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाएगा, जिससे संवाद और समस्या निवारण तत्काल संभव हो सके।
बैठक में वाप्कोस ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से सभी संवेदकों के कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुख्य सचिव ने उन संवेदकों के प्रयासों की सराहना की जिनके कार्यों में वांछित प्रगति दिखाई दी, साथ ही उन्हें बधाई भी दी।
मुख्य सचिव ने जिन संवेदकों के कार्य में प्रगति अत्यंत धीमी रही या संतोषजनक नहीं थी, उन्हें कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि प्रत्येक सोमवार को उनके द्वारा इस परियोजना की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की जाती है, और सभी कार्यों पर पैनी नज़र बनी रहेगी। उन्होंने कहा, "कार्य में प्रगति लाना अति आवश्यक है और जिन लोगों के कार्य समय पर पूरे नहीं होंगे, उन्हें ब्लैक लिस्ट भी किया जा सकता है।
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