नैनीताल , मार्च 10 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग में संविदा पर नियुक्त और घूस लेने के आरोपी जूनियर इंजीनियर (सिविल) की बहाली से जुड़े मामले में एकलपीठ के आदेश पर मंगलवार को रोक लगा दी है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए 24 दिसंबर 2025 को एकलपीठ द्वारा दिए गए बहाली आदेश के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी है।
मामले के अनुसार निवासी उत्तरकाशी को वर्ष 2009 में जूनियर इंजीनियर (सिविल) के पद पर संविदा के आधार पर नियुक्त किया गया था। समय-समय पर उनका अनुबंध बढ़ाया जाता रहा और वर्ष 2014 में उनके नियमितीकरण के लिए संस्तुति भी की गई।
आरोप है कि 08 मार्च, 2017 को सतर्कता विभाग ने आरोपी को 50 हजार रुपए की घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसकी सुनवाई विशेष न्यायाधीश (विजिलेंस) एंटी करप्शन की अदालत देहरादून में चल रही है।
यही नहीं आरोपी जेल में बंद हैं। इसके बाद 24 मार्च 2017 को विभाग ने अनुबंध के धारा 7(3) का हवाला देते हुए आरोपी की संविदा नियुक्ति समाप्त कर दी थी।
इस फैसले को आरोपी की ओर से उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। कहा गया कि जब तक अदालत उसे दोषी करार नहीं देती, तब तक केवल ट्रायल के आधार पर सेवा से हटाया जाना उचित नहीं है।
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