पटना , जनवरी 29 -- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के लाभुकों की ओर से उत्पादित वस्तुओं की मार्केंटिग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

श्री कुमार ने आज एक्स पर लिखा कि सरकार ने राज्य की महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' शुरू की है। उन्होंने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है, जिससे प्रत्येक परिवार की एक महिला उद्यमी के रूप में स्थापित हो सके।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने बताया कि इस योजना के प्रथम चरण में प्रत्येक परिवार की एक महिला को 10 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि अब तक एक करोड़ 56 लाख लाभुकों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डी.बी.टी) के जरिए राशि हस्तांरित कर दी गई है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में शेष आवेदकों को भी नियमानुसार डी.बी.टी के माध्यम से उनके खाते में शीघ्र ही राशि भेज दी जाएगी।इस योजना में महिलाओं के रोजगार शुरू करने के छह माह बाद आकलन करते हुए आवश्यकतानुसार दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता राशि दिए जाने का प्रावधान है।

श्री कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत चयनित लाभुकों को दो लाख रूपये तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिये कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह राशि चरणों में दी जाएगी बशर्ते कि पूर्व में दी गई राशि का रोजगार करने के लिये सदुपयोग किया गया हो। अच्छा रोजगार चलने की स्थिति में आवश्यकतानुसार एकमुश्त राशि भी दी जा सकती है।

मुख्यमंत्री श्री कुमार ने बताया कि विभाग को निर्देश दिया गया है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत लाभुकों की उत्पादित वस्तुओं की मार्केंटिग की भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही इन लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी विभागों के कार्यों से भी जोड़ा जाए जैसे- पोशाक निर्माण, सुधा बिक्री केन्द्र, दीदी की रसोई इत्यादि। उन्होंने कहा कि इस योजना के क्रियान्वयन से न सिर्फ महिलाओं की स्थिति और ज्यादा मजबूत होगी बल्कि राज्य के अंदर ही उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे तथा रोजगार के लिए मजबूरी में लोगों को राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

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