पटना , मार्च 06 -- मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष) के तहत बिहार में 100 या उससे अधिक आबादी वाले छूटे हुये ग्रामीण टोलों को पक्की सड़कों से जोड़ने के अभियान के अंतर्गत मार्च तक 2,078 बसावटों को सड़क मार्ग से जोड़ दिया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा और विकास को नई गति मिली है।
विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्यभर में बिना संपर्क वाली बसावटों की पहचान के लिये विशेष मोबाइल ऐप के माध्यम से सर्वे कराया गया है, जिसमें 11,020 बसावटों को चिन्हित किया गया है जिन्हें मुख्य मार्गों से जोड़ना है। इन बसावटों को बारहमासी सड़क संपर्कता देने के लिये 14,002 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है।
अब तक 6,076 बसावटों को पक्की सड़क से जोड़ने की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, जिसके तहत 8,033.23 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें से 2,210 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा कर 2,078 बसावटों तक पक्की सड़क पहुंचा दी गई है।
जिलों में प्रदर्शन की बात करें तो पूर्वी चंपारण में सबसे अधिक 239 बसावटों को करीब 300 किलोमीटर सड़क से जोड़ा गया है। इसके अलावा कैमूर में 195, औरंगाबाद में 161 और गया जी में 149 बसावटों को सड़क संपर्कता प्रदान की गई है।
ग्रामीण कार्य विभाग ने कहा है कि शेष बची बसावटों को भी तय समय- सीमा के भीतर पक्की सड़कों से जोड़ने के लिए कार्य तेज गति से जारी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
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