बेंगलुरु , अक्टूबर 29 -- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। पीआईएल में सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों के प्रतिनिधित्व वाले निर्वाचन क्षेत्रों के पक्ष में मुख्यमंत्री अवसंरचना विकास कार्यक्रम (सीएमआईडीपी) के अंतर्गत धन का आवंटन भेदभावपूर्ण तरीके से करने का आरोप लगाया गया है।
मुख्य न्यायाधीश विभू बाखरू और न्यायमूर्ति सीएम पूनाचा की खंडपीठ ने भारतीय जनता पार्टी विधायक जगदीश शिवय्या गुडागुंती द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि 2025-26 के राज्य बजट में, सत्तारूढ़ दल के विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों को सीएमआईडीपी के अंतर्गत 50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए जबकि विपक्षी विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों को केवल 25 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
उन्होंने याचिका में कहा कि इस प्रकार का विभेदकारी आवंटन संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है जो कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है, साथ ही यह अनुच्छेद 38 और 39 के अंतर्गत राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों का भी उल्लंघन करता है।
याचिका में न्यायालय द्वारा सरकार को निर्देश देने की मांग की गई कि वह अन्य निर्वाचन क्षेत्रों की तरह याचिकाकर्ता के प्रतिनिधित्व वाले बागलकोट जिले के जामखंडी विधानसभा क्षेत्र को 50 करोड़ रुपये आवंटित करे।
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