पटना , फरवरी 20 -- शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाते हुये 'न्याय के साथ विकास' के संकल्प को प्रारंभिक, माध्यमिक, उच्च और तकनीकी स्तर पर ठोस परिणामों में बदल रही है।

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने ये बातें शुक्रवार को बिहार विधान परिषद में कहीं। वे शिक्षा विभाग के बजट मांग पर विस्तृत वक्तव्य प्रस्तुत कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि समाज के सभी वर्गों, विशेषकर बालिकाओं, आर्थिक रूप से कमजोर, दलित, महादलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और अभिवंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध हो।

शिक्षा मंत्री श्री कुमार ने सदन को बताया कि वित्तीय वर्ष 2026- 27 में शिक्षा विभाग पर कुल 60,204.60 करोड़ रुपये का बजटीय उपबंध और उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत कुल आठ हजार, बारह करोड़, चौतीस लाख, चौबीस हजार रुपये का उपबंध प्रस्तावित है, जो वर्ष 2005- 06 के 4,438.80 करोड़ रुपये की तुलना में अभूतपूर्व वृद्धि को दर्शाता है। राज्य के कुल बजट का लगभग 20 प्रतिशत शिक्षा के लिये समर्पित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि बिहार सरकार की प्राथमिकताओं में शिक्षा सर्वोपरि है।

उन्होंने बताया कि निश्चय-1 और निश्चय-2 के तहत शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और अब '7 निश्चय-3 (2025- 30)' के अंतर्गत 'उन्नत शिक्षा: उज्ज्वल भविष्य' विज़न पर काम किया जा रहा है। इसके तहत 2026- 27 में हर प्रखंड में मॉडल स्कूल खोलने के लिये 800 करोड़ रुपये का प्रावधान है, 213 प्रखंडों में नये डिग्री कॉलेज स्थापित होंगे, 31 कॉलेजों को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया जायेगा, एक नई एजुकेशन सिटी बनाई जायेगी और उच्च शिक्षा के लिये अलग विभाग गठित किया गया है।

मंत्री श्री कुमार ने कहा कि शिक्षक नियुक्ति के क्षेत्र में बिहार ने पारदर्शिता और सुशासन का राष्ट्रीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से 2,60,698 शिक्षकों (प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापक सहित) की नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि टीआरई-4 के अंतर्गत 45,198 अतिरिक्त नियुक्तियों की प्रक्रिया जारी है। बिहार में महिला सशक्तिकरण की ठोस नींव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने रखी है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व और सतत नीतिगत प्रयासों का ही प्रत्यक्ष परिणाम है कि आज बिहार के शिक्षा तंत्र में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची है। वर्तमान में राज्य में कुल शिक्षकों का 44 प्रतिशत महिलायें हैं। मुख्यमंत्री ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब नीति, नीयत और निरंतरता एक साथ आगे बढ़ती हैं, तब महिला सशक्तिकरण केवल नारा नहीं, बल्कि संस्थागत वास्तविकता बन जाता है।

उन्होंने बताया कि छात्र कल्याण के क्षेत्र में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल करते हुये कक्षा एक से 12 तक की सभी छात्रवृत्तियों को दोगुना कर दिया है और वित्तीय वर्ष 2025- 26 में डीबीटी के माध्यम से 846 करोड़ की राशि सीधे छात्रों के खातों में अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन, पोशाक और साइकिल योजनाओं के माध्यम से करोड़ों छात्र- छात्राओं को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हो रहा है। प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत प्रतिदिन औसतन 1.03 करोड़ बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, साथ ही गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये एनएबीएल और थर्ड- पार्टी मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है और रसोइयों के मानदेय में भी वृद्धि की गई है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्कूल अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने के लिये बिहार राज्य शैक्षिक अवसंरचना विकास निगम के माध्यम से कक्षाओं, बेंच- डेस्क, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं का व्यापक विकास किया जा रहा है। आईसीटी और स्मार्ट क्लास की सुविधा हजारों विद्यालयों में उपलब्ध कराई गई है, जबकि पीएम-श्री योजना के तहत 836 विद्यालयों को स्वीकृति दी गई है। गणित और विज्ञान के लिये इंटीग्रेटेड लैब्स और कक्षा 7 के लिये आईसीटी पाठ्यपुस्तक की व्यवस्था से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पहुंच, पारदर्शिता और रोजगारपरकता को प्राथमिकता देते हुये समर्थ ईआरपी प्रणाली के माध्यम से नामांकन, परीक्षा, परिणाम और वित्तीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन किया गया है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत अब तक 13,765.96 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिससे आईआईटी, आईआईएम और मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत हजारों छात्र लाभान्वित हो रहे हैं। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 2,450 सहायक प्राध्यापकों और 114 प्राचार्यों की नियुक्ति की गई है।

शिक्षा मंत्री श्री कुमार ने कहा कि विज्ञान, तकनीक और कौशल विकास को बढ़ावा देते हुये राज्य में कृत्रिम बुधिमत्ता (एआई) आधारित शिक्षा को लागू किया जा रहा है और नैसकॉम के सहयोग से भविष्य के कौशलों का समावेश किया गया है। वर्ष 2020 से 2025 के बीच इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों के 30,700 छात्रों का प्लेसमेंट सुनिश्चित किया गया है। साइंस सिटी, तारामंडल और एआई आधारित डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

उन्होंने बताया कि राज्य में आउट- ऑफ- स्कूल बच्चों की संख्या वर्ष 2005 के 12 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2025 में एक प्रतिशत से भी कम हो गई है। छात्र- शिक्षक अनुपात में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो 2005 में 65:1 से घटकर 2025 में 29:1 हो गया है। साक्षरता दर और जेंडर पैरिटी में निरंतर सुधार हो रहा है, जबकि उच्च शिक्षा में जेंडर पैरिटी इंडेक्स 0.92 तक पहुंच चुका है।

मंत्री श्री कुमार ने सदन में यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के प्रति 'शून्य सहनशीलता' की नीति सख्ती से लागू है और किसी भी स्तर पर अनियमितता पाये जाने पर त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा को मानव संसाधन विकास, सामाजिक न्याय और आर्थिक प्रगति की आधारशिला मानती है। राज्य का लक्ष्य बिहार को पुनः ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाना है, जहां गुणवत्ता, समानता और अवसर साथ- साथ विकसित हों।

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