भोपाल , नवम्बर 4 -- पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री अरुण यादव ने कहा है कि प्रदेश और देश की भाजपा सरकारें किसानों के हित की बातें केवल मंचों और भाषणों तक सीमित रखती हैं, जबकि हकीकत में किसानों के साथ निरंतर अन्याय हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एमएसपी देने के नाम पर केवल घोषणाएं कर रही है, जबकि सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी प्रमुख फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं की जा रही। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा और वे लगातार घाटे में जा रहे हैं।
अरुण यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा केंद्र सरकार को गेहूं और धान को समर्थन मूल्य पर खरीदने में असमर्थता जताते हुए पत्र लिखना भाजपा सरकार की नाकामी का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जब खुद सरकार स्वीकार कर रही है कि वह किसानों से एमएसपी पर खरीद नहीं कर सकती, तो किसानों को झूठे सपनों में क्यों रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा चुकी हैं।
उन्होंने सरकार द्वारा जारी हालिया आदेश को भी तुगलकी फरमान बताया, जिसमें कहा गया है कि यदि किसानों को 10 घंटे से अधिक बिजली दी गई तो अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन काटा जाएगा। यादव ने कहा कि जब सरकार राज्य को बिजली सरप्लस बताती है, तो किसानों को पर्याप्त बिजली क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि सिंचाई व्यवस्था और उत्पादन क्षमता को सीमित करना किसानों के मूल अधिकारों का हनन है और सरकार किसानों की समस्याओं को समझने में पूरी तरह विफल रही है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन आज हालात यह हैं कि किसानों की आय दोगुनी तो नहीं हुई, बल्कि उनका आर्थिक बोझ दोगुना हो गया है। कर्ज, बढ़ती लागत, समर्थन मूल्य न मिलने और बिजली संकट के कारण किसान बदहाल स्थिति में हैं।
अरुण यादव ने सरकार से मांग की कि सोयाबीन, मक्का और कपास सहित सभी फसलों की खरीद तुरंत समर्थन मूल्य पर शुरू की जाए। किसानों को पर्याप्त बिजली आपूर्ति दी जाए और तुगलकी आदेश तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही प्रदेशभर में खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाकर भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत और आत्मसम्मान भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि किसान कमजोर होगा, तो देश मजबूत नहीं रह सकता। भाजपा सरकार को किसानों के हक और अधिकारों की अनदेखी बंद करनी होगी, अन्यथा किसान इस अन्याय का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से अवश्य देंगे।
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