मुंबई , जनवरी 11 -- मुंबई की एक सत्र अदालत ने जाली डाक टिकटों से जुड़े एक अंतरराज्यीय रैकेट में कथित संलिप्तता के लिये गिरफ्तार बिहार के व्यवसायी शाहिद रजा को जमानत देने से इनकार कर दिया है। इस काराेबारी को पिछले साल 16 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने जांच एजेंसी द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेजों और दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दलीलों की जांच करने के बाद यह आदेश पारित किया है।

मुंबई जनरल पोस्ट ऑफिस के डाक निरीक्षक द्वारा एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मध्य प्रदेश के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल ने मुंबई जनरल पोस्ट ऑफिस को एक गोपनीय पत्र भेजा था जिसमें बताया गया था कि मुंबई से भेजे गए पांच पत्रों पर नकली डाक टिकट पाए गए हैं। इस सूचना के बाद डाक अधिकारियों और पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की।

जांच के दौरान पता चला कि संदिग्ध पत्रों पर लगे डाक टिकट भायंदर स्थित के.के. सर्विसेज द्वारा आपूर्ति किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि ये पत्र एक बहुराष्ट्रीय कंपनी से जुड़े थे, जिसने डाक सामग्री बुकिंग के लिए के.के. सर्विसेज को सौंपी थी। आरोप है कि डाक शुल्क का चेक राकेश बिंद को दिया गया था, जो इस मामले में नामजद आरोपियों में से एक है।

जांचकर्ताओं ने पाया कि बिंद ने 10 जून, 2025 को 4,986 पत्र और 13 जून को 6,995 पत्र जमा किए थे। सत्यापन करने पर अधिकारियों ने पाया कि इन पत्रों पर इस्तेमाल किए गए कुछ डाक टिकट नकली थे। इन आधार पर, जांचकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला कि बिंद द्वारा संचालित डाक टिकटों की फ्रेंचाइजी नकली टिकटों के इस्तेमाल में शामिल थी। जांच में यह भी सामने आया कि बिंद एक फ्रेंचाइजी चला रहा था और उसने आधिकारिक तौर पर 15 लाख रुपये के डाक टिकट खरीदे थे जबकि लगभग 1.80 करोड़ रुपये के डाक टिकटों का उपयोग करके डाक सामग्री भेजी थी। यह पता चला कि उसने इन लेन-देन को अंजाम देने के लिए जाली टिकट प्राप्त किए थे।

जांच में आगे पता चला कि बिंद ने नकली डाक टिकट बनाकर और उनका इस्तेमाल करके सरकार को धोखा दिया था और इस कथित अवैध गतिविधि से प्राप्त धनराशि शाहिद रजा के बैंक खाते में स्थानांतरित की गई थी। इन निष्कर्षों के आधार पर, औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया गया। जमानत की अर्जी दाखिल करते हुए रजा ने कहा कि उन्हें कथित अपराध से प्राप्त किसी भी प्रकार की आय का कोई लाभ नहीं मिला और वे नकली डाक टिकटों के निर्माण या उपयोग में शामिल नहीं थे। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वे मुख्य आरोपी को नहीं जानते थे और दावा किया कि उनकी भूमिका केवल धन हस्तांतरण संबंधी गतिविधियों तक सीमित थी, जिसका अपराध से कोई सीधा संबंध नहीं था।

जमानत याचिका का विरोध करते हुए लोक अभियोजक आनंद सुखदेव ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से प्राप्त जानकारी से विभिन्न राज्यों के चार-पांच अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता का संकेत मिलता है। उन्होंने अदालत को बताया कि इन आरोपियों ने कथित तौर पर लगभग सात से आठ करोड़ रुपये के नकली डाक टिकट बनवाने का आदेश दिया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत को आगे सूचित किया कि लगभग चार से पांच करोड़ रुपये के लेनदेन आरोपी के राष्ट्रीयकृत बैंक खातों के माध्यम से किए गए थे और ग्राम पंचायत के नोडल अधिकारी को पत्र भेजा गया था जिनसे प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित