नयी दिल्ली , मार्च 05 -- मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना का निर्माण कर रही कंपनी नेशनल हाईस्पीड रेल कार्पोरेशन लि. (एनएचएसआरसीएल) ने इन बुलेट ट्रेन परियोजनाओं की लागत में वृद्धि तथा इससे भारतीय रेल पर बोझ बढ़ने के बारे में की गयी कतिपय टिप्पणियों को 'अपुष्ट तथ्यों पर आधारित अटकलबाजी' करार देते हुए कहा है कि इनमें 'कई दावे असल में गलत हैं।'एनएचएसआरसील ने कहा है कि परियोजना की शुरुआती लागत दस साल पहले प्रारंभिक अनुमानों के आधार पर तय की गयी थी और अवसंरचना क्षेत्र की बड़ी परियोजनाओं में दुनिया भर में विस्तृत डिजाइन तय होने, इंजीनियरिंग तथा अनुबंध को अंतिम रूप देने के बाद परियोजना लागत में संशोधन एक सामान्य बात होती है। कंपनी ने भारतीय रेल पर बोझ की बात को खारिज करते हुए कहा है कि जापान के साथ इसके वित्त पोषण का एक स्पष्ट समझौता हुआ है और उससे बहुत ही रियायती ब्याज पर कर्ज मिला है।
सोशल मीडिया पर केरल कांग्रेस ने मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट को टैग करते हुए 'सफेद हाथी मोदी' शीर्षक एक टिप्पणी में कहा है, "जैसा कि हमने लगभग दो साल पहले बताया था कि श्री मोदी की दिखावा करने वाली इस परियोजना - मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन, की लागत मूल रूप से 1.1 लाख करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गई है। जबकि परियोजना अभी आधा ही बनी है और अंतिम लागत 2.5 गुना से ज़्यादा हो सकती है।"एनएचएसआरसीएल ने कहा है, "अहमदाबाद-मुंबई हाईस्पीड रेल कॉरीडोर की संशोधित लागतें वैश्विक मानकों के बराबर हैं। परियोजना के लिए कर्ज हेतु भारत और जापान के बीच विस्तृत समझौता हुआ है और उसको लेकर किसी तरह की अटकलबाजी का कोई आधार नहीं है। इस परियोजना के लिए किसी सरकार से मिले सबसे सस्ती दरों के कर्जों में से एक है और इस पर ब्याज की दर बहुत कम है और भुगतान लम्बे समय में किया जाना है।
कंपनी ने कहा है, "कर्ज की ऐसी शर्तों की वजह से ही इस परियोजना को द्विपक्षीय भागीदारी के तौर पर बनाया गया था। इसके उलट की जा रही बातें सच की जगह अटकलबाजी ही लगती हैं।"एनएचएसआरसील ने साफ साफ कहा है कि इस परियोजना के लागत अनुमान में संशोधन को भारतीय रेल का परिचालन दायित्व बताना संस्थागत व्यवस्था के प्रति गलतफहमी का नतीजा दिखाता है।
कंपनी ने कहा है कि हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर समय की बचत और उत्पाकता बढ़ाने वाली , हवाई अड्डों और राजमार्गों की भीड़ में कमी लाने वाली, मार्ग के आस पास के इलाकों की अर्थव्यवस्था को ताकत देने वाली , प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और घरेलू विनिर्माण क्षमता के ज़रिए मूल्य सृजित करने वाली है। इस तरह के कई गुणा लाभ हैं जिनके आधार पर ऐसी परियोजनाओं का अंतर्रार्ष्टीय स्तर पर पर मूल्यांकन किया जाता है।
एनएचएसआरसील ने कहा है कि बुलेट ट्रेन की टिकट सस्ती होगी और अंदाजे के आधार पर बताये जा रहे अनुमानित किराये लोगों को गुमराह करने के लिए हैं।
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना भारत का पहला उच्च गति वाला रेल कॉरिडोर है। सरकार का शुरू से कहना है कि यह केवल एक रेल मार्ग का निर्माण नहीं बल्कि देश में आगे और भी ऐसे मार्गों के विकास के लिए ज़रूरी टेक्नोलॉजिकल, इंजीनियरिंग और औद्योगिक आधार को स्थापित करना है।
कंपनी ने कहा है कि इस हाई स्पीड गलियारे का सामाजिक-आर्थिक लाभ परियोजना के वित्तीय प्रतिफल से कही ज़्यादा है और यह परियोजना देश में हाई स्पीड रेल मार्ग के निर्माण की नींव रखती है, जो विकसित भारत के लिए ज़रूरी परिवर्तन सुविधाओं में क्रांति लाएगा।
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