धार , जनवरी 02 -- आदिवासी बाहुल्य धार जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे नियमित जांच अभियान के तहत लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट आने के बाद एडीएम न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। अलग-अलग मामलों में एडीएम न्यायालय द्वारा करीब 12 लाख रुपए से अधिक का जुर्माना विभिन्न संस्थाओं और आरोपियों पर लगाया गया है।
ग्रामीण एवं औद्योगिक क्षेत्रों से लिए गए खाद्य सैंपलों के प्रकरणों में एडीएम संजीव केशव पांडेय के न्यायालय ने 8 से अधिक मामलों में मिथ्याछाप, मिस ब्रांड और बिना लाइसेंस खाद्य पदार्थों के निर्माण व विक्रय को प्रमाणित पाया। सभी मामलों में सुनवाई के बाद न्यूनतम 50 हजार रुपए से लेकर अधिकतम 1 लाख रुपए तक का अर्थदंड अधिरोपित किया गया। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रकरणों के आधार पर की गई।
जिला अधिकारी सचिन लोंगरिया ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अंतर्गत दर्ज प्रकरणों में निर्णय देते हुए एडीएम न्यायालय ने कुल लगभग 12 लाख रुपए का जुर्माना विभिन्न आरोपियों पर लगाया है।
उन्होंने बताया कि पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर-3 स्थित मेसर्स एग्रोसिया ओवरसीज के पार्टनर भेरूलाल चौहान पिता भगवान सिंह चौहान, नॉमिनी अनूप गुप्ता तथा फर्म पर मिथ्याछाप सोया ग्रिट के निर्माण एवं विक्रय के आरोप प्रमाणित पाए जाने पर प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। वहीं कुक्षी स्थित मेसर्स कृष्ण स्वीट्स के प्रोपराइटर शांतिलाल पिता शोभाराम धनगर पर मिथ्याछाप मावा पेड़ा के निर्माण एवं विक्रय के मामले में एक लाख रुपए का अर्थदंड लगाया गया।
जानकारी के अनुसार मेसर्स जननी हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज, जो शक्ति पंप्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पीथमपुर की कैंटीन का संचालन करती है, उसके सुपरवाइजर राजेश पिता रामनारायण विश्वकर्मा पर मिथ्याछाप मेज़ स्टार्च के उपयोग पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। साथ ही प्रोपराइटर श्रीमती दिव्यश्री पति अजीत शेट्टी पर भी 50 हजार रुपए तथा मेज़ स्टार्च निर्माता मेसर्स स्नेहा ट्रेडर्स, इंदौर के प्रोपराइटर मुकेश कुमार पर एक लाख रुपए का जुर्माना अधिरोपित किया गया।
इसके अलावा ग्राम बगड़ी तहसील एवं जिला धार स्थित मेसर्स आयुष पैकेजिंग के प्रोपराइटर आयुष पिता संतोष अग्रवाल पर मिथ्याछाप एवं अमानक हल्दी पाउडर, मिर्ची पाउडर और धनिया पाउडर के निर्माण एवं विक्रय के आरोप में 1 लाख 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिलेभर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार की जांच और कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
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