आइजोल , मार्च 13 -- मिजोरम का सबसे प्रिय और जीवंत पारंपरिक उत्सव 'चापचर कुट' उत्सव का मुख्य समारोह आइजोल के 'असम राइफल्स ग्राउंड' (लम्मुअल) में आयोजित किया गया, जहाँ भारी संख्या में लोग और गणमान्य व्यक्ति एकत्रित हुए।
मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस भव्य समापन समारोह में 'कुट पा' (उत्सव के पिता) के रूप में शिरकत की। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह त्योहार हमारे पूर्वजों की कृषि प्रधान जीवन शैली की याद दिलाता है और समुदाय को आपस में जोड़ने का काम करता है।
वसंत के आगमन पर मनाया जाने वाला 'चापचर कुट' मिजो समुदाय के लिए गहरा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। इस त्योहार की जड़ें पारंपरिक 'झूम' (जंगल काटकर जलाना) खेती से जुड़ी हैं। जब किसान खेती के लिए जंगलों की कटाई पूरी कर लेते हैं, तो खेती के अगले चरण से पहले मिलने वाले विश्राम के समय को उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
लम्मुअल मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मिजो संस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिली। उत्सव का मुख्य आकर्षण विश्व प्रसिद्ध बांस नृत्य 'चेराव' रहा, जहाँ लयबद्ध तरीके से बांसों के बीच नर्तकों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। विभिन्न मिजो उप-जनजातियों के दलों ने अपने पारंपरिक नृत्यों के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता पेश की। बच्चों के पारंपरिक खेल और गीतों ने उत्सव में उत्साह भर दिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे हजारों लोगों ने पूरे मैदान को उत्सव के रंगों से भर दिया।
इस वर्ष के चापचर कुट का विषय "जोनुन जे मावी - इनरेमना"रखा गया था, जिसका अर्थ है मिजो जीवन शैली की पहचान के रूप में सद्भाव और एकता।
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