नयी दिल्ली , जनवरी 15 -- कृषि निर्यात में एक बेहद खास उपलब्धि हासिल करते हुए कर्नाटक के तीन भौगोलिक संकेत (जीआई) प्राप्त तीन उत्पादों नंजनगुड रसबले केला, मैसूर के पान के पत्ते और इंडी नींबू की पहली हवाई खेप मालदीव भेजी गई है।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने गुरूवार को सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा दी।

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के जरिए भेजी गयी यह पहली खेप कृषि निर्यात को बढ़ावा देने में खासी अहम है। इसका मकसद वैश्विक बाजार में भारत की जीआई विरासत को पेश करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेती के उत्पादों को पहुंचाना है। इससे न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि उनके लिए नए वैश्विक बाजारों भी खुलेंगे। एपीडा के अनुसार, गुणवत्ता वाले उत्पादों के चयन और तयशुद वक्त में उन्हें भेजने से कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग को विश्व स्तर पर मजबूत किया जा रहा है।

मालदीव को निर्यात किए गए कर्नाटक के इन तीनों जीआई-टैग्ड उत्पादों की अपनी विशिष्ट विशेषताएं हैं, जो इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनूठा बनाती हैं।

नंजनगुड रसबले केला अपनी अनूठी सुगंध और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। इसकी खेती मुख्य रूप से मैसूर जिले के नंजनगुड क्षेत्र में की जाती है। माना जाता है कि वहां की काली मिट्टी के विशेष गुणों के कारण इस केले में एक अनोखा स्वाद विकसित होता है। आकार में यह अन्य केलों की तुलना में छोटा होता है और इसका छिलका बहुत पतला होता है।

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