सिलीगुड़ी , अप्रैल 18 -- राजनीतिक रूप से संवेदनशील उत्तरी बंगाल के मालदा ज़िले में चुनावी अभियान ने ज़ोर पकड़ लिया है और शहरी और ग्रामीण इलाकेअलग-अलग कहानियों, हस्तियों और बदलती वफ़ादारियों का अखाड़ा बन गय हैं।

हाल के दिनों में यह मुकाबला काफ़ी नाटकीय हो गया है, जिसमें बड़ी पार्टियों ने अहम वोट बैंक को मज़बूत करने के लिए अपने स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारा है, खासकर कालियाचक, सुजापुर और मोथाबाड़ी के मुस्लिम-बहुल इलाकों में। तृणमूल कांग्रेस ने इस हफ़्ते की शुरुआत में ही पूर्व भारतीय क्रिकेटर और बहरामपुर के सांसद यूसुफ़ पठान को मैदान में उतारकर माहौल बना दिया था। सुजापुर और आस-पास के इलाकों में उनके रोड शो में भारी भीड़ उमड़ी, जिसे बड़े पैमाने पर पार्टी की अल्पसंख्यक-बहुल सीटों पर अपनी पकड़ मज़बूत करने की एक चाल के तौर पर देखा गया। तृणमूल कांग्रेस ने गाज़ोल और आस-पास के इलाकों जैसे हिंदू-बहुल क्षेत्रों में प्रचार करने के लिए फ़िल्म सितारों को भी शामिल किया है, जिनमें अभिनेता देव भी शामिल हैं। कांग्रेस ने इसका तुरंत जवाब दिया। पार्टी ने शनिवार को दिग्गज क्रिकेटर मोहम्मद अज़हरुद्दीन को मैदान में उतारा, जिन्होंने कालियाचक, सुजापुर और मोथाबाड़ी में अपनी ताक़त का एक समानांतर प्रदर्शन किया जो इस बात का संकेत था कि पार्टी उस ज़िले में अपनी खोई हुई ज़मीन वापस पाना चाहती है। यह इलाका कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था।

इस बीच, आईएसएफ के साथ वाम मोर्चा ने चुनावी मुकाबले में नयी जान डाल दी है। आईएसएफ नेता नौशाद सिद्दीकी ने दो दिनों तक इंग्लिश बाज़ार, सुजापुर और मोथाबाड़ी में ज़ोरदार प्रचार किया, जिससे भारी भीड़ उमड़ी। खास बात यह है कि समर्थकों के कुछ वर्गों को उन्हें "कॉमरेड नौशाद" कहकर संबोधित करते हुए सुना गया, जो वाम दल और आईएसएफ की राजनीतिक संस्कृतियों के एक अनोखे मेल को दिखाता है। हालाँकि, आईएसएफ का प्रचार अभियान विवादों से अछूता नहीं है। मोथाबाड़ी से उम्मीदवार अभी भी जेल में है, जिसे न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक बंधक बनाने के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। इसके बावजूद श्री सिद्दीकी ने एक चुनौती भरा रुख अपनाते हुए दावा किया कि आईएसएफ और वाम मोर्चा के उम्मीदवार इस क्षेत्र से विजयी होकर निकलेंगे। भार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम भी प्रचार अभियान में सक्रिय रहे हैं, जिससे उस ज़िले में वाम मोर्चा के प्रयासों को बल मिला है जहाँ कभी उसका काफी प्रभाव था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी ओर से एक बहु-स्तरीय अभियान चलाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही रैलियों को संबोधित कर चुके हैं, जबकि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने आदिवासी-बहुल इलाकों पर ध्यान केंद्रित किया। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने भी शनिवार को कुछ चुनिंदा निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार किया।

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