लखनऊ , दिसंबर 4 -- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। इसके तहत प्रदेश के 47.76 लाख परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 2000 लाख मानव दिवस सृजन (रोजगार की संख्या) का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष अब तक 1768.81 लाख मानव दिवस सृजित किए जा चुके हैं, जो देश में सर्वाधिक है। इसके तहत 47.76 लाख परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। राज्य सरकार ने अब तक 6598.89 करोड़ रुपये की धनराशि मनरेगा योजनाओं पर खर्च की है।

उपमुख्यमंत्री मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मनरेगा अभिसरण के तहत होने वाले कार्यों में अन्य विभागों की अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कन्वर्जेंस कार्यक्रमों की प्रगति को तेज करते हुए लक्ष्यों को शत-प्रतिशत प्राप्त किया जाए।

इसके साथ ही उन श्रमिकों को श्रम विभाग की बीओसीडब्ल्यू (बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स) बोर्ड में पंजीकृत कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिन्होंने 90 दिन तक मनरेगा में कार्य किया है, ताकि वे श्रम विभाग की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

ग्राम्य विकास आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी का कहना है कि योजना का प्राथमिक लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकना है। जब गांवों में ही निरंतर रोजगार उपलब्ध होगा, तभी श्रमिकों को अपने परिवार से दूर नहीं जाना पड़ेगा। आयुक्त ने चेताया कि मानव दिवस सृजन में किसी भी तरह की गिरावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिलाधिकारी व संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

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