भोपाल , अक्टूबर 23 -- मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के सदस्य डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने विगत दिनों विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित प्रथम दृष्टया मानव अधिकार उल्लंघन के आठ मामलों में संज्ञान लेते हुए संबंधित जिलों के अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
जिसमें दीपावली पर भोपाल शहर में कैल्शियम कार्बाइड गन के कारण 125 से अधिक लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित होने का मामला सामने आया है। इनमें अधिकांश बच्चे हैं। इस पर आयोग ने कलेक्टर, भोपाल से जांच कराकर दो सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है।
वही सतना जिला अस्पताल के पीआईसीयू में भर्ती चार माह के अति गंभीर कुपोषित बच्चे की इलाज के दौरान मृत्यु होने पर आयोग ने जिला परियोजना अधिकारी, सतना से दो सप्ताह में जांच प्रतिवेदन मांगा है।
जबकि रायसेन जिले के बारना बांध के पास पुलिस छापे के दौरान एक युवक के डैम में कूदने से मौत हो गई। आयोग ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक रायसेन से मामले की जांच कर मृतक के परिजनों को नियमानुसार आर्थिक सहायता देने संबंधी रिपोर्ट दो सप्ताह में मांगी है।
इसके अलावा बड़वानी जिले के सजवानी गांव में दूषित पानी पीने से दो दर्जन से अधिक ग्रामीण बीमार हो गए। आयोग ने कलेक्टर एवं सीएमएचओ बड़वानी से दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। तो सिवनी जिले के कुरई परिक्षेत्र के ग्राम पीपरवानी में बाघ के हमले में एक व्यक्ति घायल हो गया। इस पर आयोग ने डीएफओ, बालाघाट से एक माह में जांच रिपोर्ट मांगी है। शाजापुर जिले की ग्राम पंचायत दिल्लोद सुतारपुरा में सफाई न होने से नालियों का दूषित पानी घरों में घुस रहा है। आयोग ने कलेक्टर, शाजापुर से एक माह में कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा है।
तो दूसरी ओर रीवा जिले के नौबस्ता क्षेत्र में सीमेंट प्लांट की ब्लास्टिंग से आसपास के गांवों में घरों में दरारें आ गईं और प्रदूषण फैलने की शिकायतें मिलीं। आयोग ने कलेक्टर, रीवा से एक माह में जांच प्रतिवेदन मांगा है।
जबकि धार जिले के केगंधवानी थाना क्षेत्र के ग्राम बिल्दा में दिवाली बाजार के दौरान आग लगने से 50 से अधिक दुकानें, तीन मकान और दर्जनों वाहन जल गए, जबकि पांच लोग झुलस गए। आयोग ने कलेक्टर, धार से एक माह में रिपोर्ट मांगी है।
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