जिनेवा , जनवरी 01 -- संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की कई एजेंसियों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने बुधवार को एक संयुक्त बयान जारी कर इज़रायल से गाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट में अंतर्राष्ट्रीय सहायता संगठनों के संचालन पर लगे प्रतिबंध को वापस लेने का आह्वान किया है।

बयान में कहा गया है कि अंतर्राष्ट्रीय सहायता संगठन गाज़ा और पश्चिमी तट में मानवीय कार्यों में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं और सालाना लगभग एक बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 8,990 करोड़ रूपये ) की सहायता प्रदान करते हैं।

गाज़ा में सर्दी के कारण परिवारों की मुश्किलें बढ़ रही है, खाद्य असुरक्षा गंभीर बनी हुई है और जीवन रक्षक सहायता की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है, ऐसे में सहायता समूहों पर प्रतिबंध लगाने से युद्धविराम के दौरान हुई मामूली प्रगति को नुकसान पहुँच सकता है। बच्चों, महिलाओं और पुरुषों के लिये इसके और भी विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।

बयान में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि मानवीय सहायता तक पहुँच न तो वैकल्पिक है और न ही यह किसी शर्त या राजनीतिक विचारों के अधीन है। यह अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत एक कानूनी दायित्व होने के साथ-साथ मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए एक मौलिक आवश्यकता भी है।

इस बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में मानवीय मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र (ओसीएचए) के अवर महासचिव टॉम फ्लेचर, खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के महानिदेशक क्यू डोंग्यू, अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईएमओ) की महानिदेशक एमी ई. पोप , मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र (यूएनएचआरसी) के उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के प्रशासक अलेक्जेंडर डी क्रू, यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल, यूएन वीमेन की कार्यकारी निदेशक सीमा बहौस और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम घेब्रेसियस और अन्य शामिल हैं।

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