नयी दिल्ली , जनवरी 01 -- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है जिसमें कहा गया है कि मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गयी और 40 से ज़्यादा लोग बीमार पड़ गए।

निवासियों ने कई दिनों से दूषित पानी की सप्लाई के बारे में कई शिकायतें की थीं, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

आयोग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "अगर खबर सही है तो यह पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। इसलिए, इसने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ़्ते के अंदर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।"इसी खबर के बाद एक और घटनाक्रम में मध्य प्रदेश शहरी प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को नर्मदा नदी के दूषित पानी से हुई मौतों के संबंध में सवाल पूछने वाले पत्रकार के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने के लिये आलोचना का सामना करना पड़ा।

श्री विजयवर्गीय ने शुरू में मीडिया के सवालों को "बेबुनियाद" बताकर खारिज कर दिया और उनका जवाब देने से बचने की कोशिश की। जब पत्रकारों ने ज़ोर दिया तो मंत्री ने कुछ एक पत्रकार के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इस घटना का एक वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

आलोचना के बाद मंत्री ने अपनी गलती मानी और सोशल मीडिया पर माफी मांगी। विपक्षी कांग्रेस ने मंत्री के व्यवहार की कड़ी आलोचना की। मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी ने विजयवर्गीय के तत्काल इस्तीफे की मांग की और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंत्री की टिप्पणियों का संज्ञान लेने का आग्रह किया।

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