शिवपुरी , दिसंबर 10 -- मध्यप्रदेश में माधव राष्ट्रीय उद्यान को माधव टाइगर रिजर्व का दर्जा प्राप्त हुए एक वर्ष का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद उद्यान के प्रवेश द्वार सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर अब भी माधव राष्ट्रीय उद्यान नाम वाले पुराने साइन बोर्ड ही लगे हुए हैं। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को उद्यान के वास्तविक नाम को लेकर लगातार भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
उद्यान प्रशासन के सूत्रों ने आज बताया कि टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद विभागीय स्तर पर कई संरचनात्मक और प्रशासनिक बदलाव किए गए थे, लेकिन विभिन्न स्थानों पर लगे नामफलक और सूचना बोर्ड तकनीकी कारणों के चलते समय पर बदले नहीं जा सके। हालांकि अब वन विभाग ने इस कार्य को प्राथमिकता में लेते हुए सभी स्थानों पर नए बोर्ड लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
सूत्रों के अनुसार टाइगर रिजर्व की पहचान और ब्रांडिंग को स्पष्ट एवं एकरूप बनाने के लिए नए बोर्डों का डिजाइन तैयार कर लिया गया है और इन्हें लगाने के आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। जल्द ही प्रवेश द्वार, मार्ग संकेतक, कार्यालय परिसर, विश्राम स्थल, रेंज कार्यालयों और अन्य स्थलों पर माधव टाइगर रिजर्व नाम से प्रदर्शित नए बोर्ड दिखाई देने लगेंगे।
पर्यटकों की ओर से लगातार यह शिकायत मिल रही थी कि पुराने बोर्डों पर माधव राष्ट्रीय उद्यान लिखा होने से उन्हें समझ नहीं आता कि यह स्थान टाइगर रिजर्व में शामिल हो चुका है या नहीं। इससे भ्रम की स्थिति बनती है और कई बार उन्हें सही जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई भी होती है।
अधिकारियों ने बताया कि बोर्ड बदलने के साथ-साथ विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों, प्रचार सामग्री और आधिकारिक दस्तावेजों में भी नाम परिवर्तन की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है। विभाग का प्रयास है कि पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उद्यान की नई पहचान पूर्ण रूप से स्थापित हो सके।
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