नयी दिल्ली , फरवरी 25 -- दिल्ली के सहकारिता एवं समाज कल्याण मंत्री रविन्द्र इंद्राज सिंह ने कहा कि हिंदुस्तान की संस्कृति में नारी को सदैव उच्च स्थान दिया गया है और "मातृशक्ति" शब्द केवल सम्मान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
श्री रविन्द्र इंद्राज ने आज यहां आयोजित "सहकार शक्ति डायलॉग " में कहा कि हिंदुस्तान की संस्कृति में नारी को सदैव उच्च स्थान दिया गया है और "मातृशक्ति" शब्द केवल सम्मान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिला का योगदान केवल परिवार या समाज निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय निर्माण में भी उतना ही महत्वपूर्ण और निर्णायक रहा है।
उन्होंने कहा कि एआई युग में सहकारिता रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार बनेगी l सहकारिता हमारी परंपरा और सामाजिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा रही है। यह केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि व्यवहारिक व्यवस्था है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि देश, समाज और आने वाले भविष्य को सशक्त बनाना है तो कॉपरेटिव सिस्टम को अपनाना ही पड़ेगा। उन्होंने एआई और नई तकनीकों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज हर क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का प्रभाव दिखाई दे रहा है, जिससे कार्यप्रणाली बदल रही है और रोजगार के स्वरूप में भी परिवर्तन आ रहा है। ऐसे समय में सहकारिता ही वह माध्यम है जो सामूहिक शक्ति के आधार पर रोजगार और आत्मनिर्भरता को सुरक्षित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि जब लोग उतार-चढ़ाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे का हाथ थामते हैं, तो छोटी पहल भी बड़ी आर्थिक शक्ति में बदल सकती है। उन्होंने अमूल जैसे मॉडलों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ महिलाओं से शुरू हुई पहल आज बड़े ब्रांड का रूप ले चुकी है, जो सहकारिता की ताकत का प्रमाण है।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि सहकारिता के लिए अलग मंत्रालय का गठन दूरदर्शी निर्णय है, और केंद्रीय स्तर पर अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता को नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि 2047 तक आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में सहकारिता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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