पालनपुर , दिसंबर 06 -- केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के वाव-थराद जिले में बनास डेयरी द्वारा नवनिर्मित बायो सीएनजी और फर्टिलाइजर प्लांट का उद्घाटन एवं 150 टन के पावडर प्लांट का शनिवार को शिलान्यास किया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि माताओं-बहनों के अथक परिश्रम से इसका कारोबार 24 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचा है।
श्री शाह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बनासकांठा में बनास डेयरी की शुरुआत करने वाले गलबाभाई नानजीभाई पटेल ने जो यात्रा शुरू की थी, वह धीरे-धीरे बढ़ते-बढ़ते इस मुकाम पर पहुंच गयी है कि आज यहां 24 हजार करोड़ रुपये तक के कारोबार हो रहे हैं। वह देश भर में जहां भी जाते हैं, वहां गर्व से कहते हैं कि गुजरात के गांवों को समृद्ध बनाने का काम राज्य की माताओं-बहनों ने किया है।
उन्होंने कहा कि यहां के किसान भाइयों, विशेष रूप से सहकारी आंदोलन के अगुआ लोगों, गांव की दूध मंडलियों के अध्यक्ष और बनास डेयरी के डायरेक्टर को शायद पता भी न हो कि उन्होंने कितना बड़ा चमत्कार कर दिखाया है। चौबीस हजार करोड़ रुपये की कंपनी खड़ी करना बड़े-बड़े कॉर्पोरेट के लिए भी पसीना छुड़ाने वाला काम होता है, लेकिन बनासकांठा की बहनों और किसानों ने देखते-ही-देखते 24 हजार करोड़ रुपये की कंपनी खड़ी कर दी।
श्री शाह ने कहा कि आज वह अपने साथ देश की संसद के दोनों सदनों,लोक सभा और राज्य सभा के सांसदों को लेकर आये हैं। उन्होंने कहा कि आगामी जनवरी में पूरे देश की सभी डेयरियों के लगभग 250 चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बनासकांठा के सहकारी डेयरी क्षेत्र में हुए चमत्कार को देखने आ रहे हैं। 1985-87 के अकाल के बाद जब वह इस इलाके में आते थे और किसानों से पूछते थे, तो बताया जाता था कि वे पूरे साल में सिर्फ एक फसल उगा पाते हैं, लेकिन अब बनासकांठा का किसान एक साल में तीन-तीन फसल उगाता है। मूंगफली भी उगाता है, आलू भी उगाता है, गर्मियों में बाजरा भी बोता है और खरीफ की फसल भी लेता है, जबकि 25 साल पहले बनासकांठा में तीन फसल की खेती करना एक स्वप्न मात्र था।
केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के उन इलाकों से यहां पानी की उपलब्धता कराने का काम किया, जहां पानी प्रचुर मात्र में उपलब्ध था। सुजलाम-सुफलाम योजना के तहत नर्मदा और माही नदी का अतिरिक्त पानी बनासकांठा पहुंचा। पहले यहां का किसान दूसरों के खेतों में मजदूरी करता था। आज उसी किसान ने अपनी जमीन को स्वर्ग बना दिया और पूरे बनासकांठा को समृद्ध बना दिया।
श्री शाह ने कहा कि हमारी यह परंपरा या आदत नहीं रही कि कोई बड़ा काम करने पर उसका पूरा दस्तावेजीकरण किया जाये या उसका इतिहास लिखा जाये, लेकिन उन्होंने दो विश्वविद्यविद्यालयों को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे बनासकांठा और मेहसाणा में जल-संचय तथा पानी के माध्यम से आई समृद्धि और लोगों के जीवन में आए परिवर्तन पर विस्तृत रिसर्च करें।
उन्होंने कहा कि बनासकांठा का यह परिश्रम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा और पूरे देश के ग्रामीण विकास के इतिहास में एक प्रेरणास्त्रोत बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि खुशी की बात यह है कि इस परिश्रम में महिलाओं का बड़ा योगदान है। चौबीस हजार करोड़ रुपये के इस विशाल कारोबार में दूध इकट्ठा करने की सारी मेहनत बनासकांठा की बहनों, बेटियों और माताओं के हाथों से हुई है। इन महिलाओं ने महिला सशक्तिकरण की बातें करने वाली विश्व की तमाम एनजीओ के सामने सबसे जीवंत और सबसे बड़ा उदाहरण प्रस्तुत कर दिया है। ऐसी पारदर्शी व्यवस्था खड़ी हो चुकी है कि बिना किसी आंदोलन या बिना किसी नारे के, सीधे माताओं-बहनों के बैंक खाते में हर हफ्ते उनके दूध का पूरा पैसा पहुंच रहा है।
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