भुवनेश्वर , फरवरी 07 -- मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को भुवनेश्वर-कटक-पुरी-पारादीप आर्थिक क्षेत्र (बीसीपीपीईआर) के लिए एक व्यापक योजना की शुरुआत की, जिसका मकसद इस क्षेत्र को ओडिशा के आर्थिक विकास का एक प्रमुख केंद्र और भारत के विकास में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनाना है। यह योजना नीति आयोग ने तैयार की है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बीसीपीपीईआर क्षेत्र भारत के विकास के क्षितिज पर एक नए सितारे के रूप में उभरेगा और देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के हर शहर की अपनी अलग-अलग खासियतें हैं। भुवनेश्वर एक टेक्नोलॉजी हब के रूप में, कटक अपनी मजबूत व्यावसायिक परंपराओं के साथ, पुरी सांस्कृतिक विरासत के केंद्र के रूप में और पारादीप एक बंदरगाह-आधारित औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विख्यात है।
श्री माझी ने कहा कि यह योजना इन शहरों को आधुनिक अवसंचना के ज़रिए जोड़ने पर केंद्रित है। साथ ही पूरे क्षेत्र में विविध विकास परियोजनाओं को लागू किया जाएगा। धातु प्रसंस्करण उद्योग, जैव प्रौद्योगिकी, कपड़ा उद्योग, रसायन, पर्यटन, शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों में 80 से ज़्यादा परियोजनाओं का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा, इस क्षेत्र को विकास और समृद्धि की प्रयोगशाला में बदलने के लिए 30 से ज़्यादा नीतिगत पहलें शुरू की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में शहर आर्थिक क्षेत्र (सीईआर) के विकास का प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें बीसीपीपीईआर भी शामिल है। हर सीईआर के लिए केंद्र सरकार ने 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में बीसीपीपीईआर क्षेत्र ओडिशा की कुल अर्थव्यवस्था का 19 प्रतिशत है, जबकि 2025 में इसका आर्थिक आकार 224 लाख डॉलर था। उन्होंने बताया कि 2047 तक इसे बढ़ाकर 5000 लाख डॉलर करने का लक्ष्य है।
श्री माझी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार तथा नीति आयोग के सहयोग से राज्य की डबल-इंजन सरकार बीसीपीपीईआर को आर्थिक परिवर्तन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस मौके पर राज्य के आवास एवं शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्रा ने कहा कि यह योजना ओडिशा के भविष्य को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएगी और राज्य के आर्थिक विकास को काफी बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि अन्य जिलों के प्रमुख शहरों के लिए भी इसी तरह की आर्थिक योजनाएं तैयार की जाएंगी। उन्होंने कहा कि 28 नई अधिसूचित क्षेत्र परिषद (एनएसी ), सात नगर पालिकाओं और एक नगर निगम का गठन शहरी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बीवीआर सुब्रमण्यम ने इस पहल के लिए राज्य सरकार को धन्यवाद दिया और कहा कि भारत का 70-80 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) शहरी इलाकों से आता है। उन्होंने कहा कि 2047 तक लक्ष्य देश की आधी से ज़्यादा आबादी को शहरीकरण के दायरे में लाना है। मुंबई, सूरत, विशाखापत्तनम और वाराणसी के बाद बीसीपीपीईआर नीति आयोग की पांचवीं ऐसी आर्थिक क्षेत्र योजना है।
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