शिमला , दिसंबर 06 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1972 की धारा 118 में संशोधन करने के राज्य सरकार के कदम पर कड़ी आपत्ति जतायी है। माकपा ने चेतावनी दी है कि बार-बार ढील और छूट देने से राज्य के लोगों की जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए बने इस संवैधानिक सुरक्षा उपाय को असल में कमजोर किया जा रहा है।

यह आपत्ति तब आयी, जब राज्य सरकार ने तीन दिसंबर को धर्मशाला के तपोवन में शीतकालीन सत्र के दौरान विधानसभा में हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स (अमेंडमेंट) विधेयक, 2025 पेश किया। विधेयक को अब परामर्श के लिए चयन समिति को भेज दिया गया है।

माकपा के राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि सरकार की धारा 118 को कमजोर करने की लगातार कोशिशें गरीबों, किसानों और गांव के लोगों के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के पर्यावरण, संस्कृति और पारिस्थितिकी को लंबे समय तक नुकसान पहुंचने का खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस जनविरोधी प्रस्ताव को वापस नहीं लिया गया, तो पार्टी पूरे राज्य में आंदोलन शुरू करेगी।

श्री चौहान ने याद दिलाया कि धारा 118 को डॉ. वाई एस परमार की सरकार ने हिमाचल प्रदेश के कम मिलने वाले प्राकृतिक संसाधनों- पानी, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए लाया था, ताकि छोटे किसानों को बाहरी दबावों से बचाया जा सके।

उन्होंने लोगों से प्रस्तावित बदलावों के खिलाफ एकजुट होने की अपील करते हुए कहा, " इस जरूरी नियम में बदलाव करने से बड़े पूंजीपतियों और कॉरपोरेट घरानों के लिए जमीन पर कब्जा करने के दरवाजे खुल जाएंगे, जिससे किसानों का शोषण होगा और स्थानीय रोजी-रोटी की सुरक्षा खत्म हो जाएगी।"राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी द्वारा पेश किये गये इस बिल का मकसद गैर-किसानों को प्राइवेट रियल एस्टेट डेवलपर द्वारा बनाये गये फ्लैट खरीदने की इजाजत देना है। इसमें एचआईएमयूडीए द्वारा बेची गयी संपत्ति के लिए मौजूदा छूट को बाद के खरीदारों तक बढ़ाने, किसानों के सदस्यों वाली कोऑपरेटिव सोसाइटियों को जमीन खरीदने की इजाजत देने और वास्तविक देरी होने पर छूट के तहत दी गयी, समय अवधि को बढ़ाने के लिए एक प्रणाली बनाने का भी प्रस्ताव है।

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