नयी दिल्ली , फरवरी 08 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रविवार को नये भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कड़ी आलोचना की और केंद्र सरकार पर अमेरिका को 'बड़ी छूट' देने का आरोप लगाया।
पार्टी का मानना है कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि और राष्ट्रीय संप्रभुता को नुकसान पहुंचेगा।
माकपा पोलित ब्यूरो ने बयान जारी कर आरोप लगाया कि तथाकथित अंतरिम व्यापार समझौते में अमेरिकी कृषि आयातों पर शून्य शुल्क लगाने की प्रतिबद्धता शामिल है, जिसमें फल, कपास, मेवा, सोयाबीन तेल और दूसरे खाने के सामान शामिल हैं। पार्टी ने चेतावनी दी कि ऐसे कदमों से कई राज्यों के किसानों की रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ेगा।
बयान में कहा गया, "सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंशिक जानकारी के अनुसार, भारतीय सरकार ने अमेरिकी कृषि उत्पादों के निर्यात पर कोई शुल्क न लगाने पर सहमति व्यक्त की है। यह निर्णय देश भर के लाखों सेब उत्पादकों, कपास और सोया किसानों की आजीविका को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचायेगा।"वामपंथी दल ने विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों की ओर इशारा कर कहा, "वे पहले से ही न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों के कारण दबाव में हैं। अमेरिका के साथ वर्तमान समझौता उनकी आजीविका को और नष्ट कर देगा।" यह भी बताया कि पहले से ही बढ़ती लागतों और कृषि संकट से जूझ रहे कपास किसान भी बुरी तरह प्रभावित होंगे।
माकपा ने उन रिपोर्टों पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिनमें सुझाव दिया गया है कि भारत कृषि आयात पर 'बिना शुल्क टैरिफ बाधाओं' को हटाने के लिए सहमत हो गया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम प्रभावी रूप से घरेलू किसानों के लिए सरकारी सहायता और अनुदान वापस लेने जैसा होगा। माकपा ने तर्क दिया कि ऐसे कदमों से भारतीय कृषि, अमेरिका के भारी अनुदान वाले कृषि उत्पादों के साथ अनुचित प्रतिस्पर्धा के घेरे में आ जायेगी। इससे खेती करना तेजी से अव्यवहारिक हो जायेगा।
इस समझौते को 'भारतीय संप्रभुता पर आघात' बताते हुए वामपंथी दल ने आरोप लगाया कि अमेरिका, रूस से तेल आयात से संबंधित फैसलों सहित भारत के नीतिगत विकल्पों को निर्देशित करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जारी कार्यकारी आदेश का हवाला देकर माकपा ने दावा किया कि यह भारत के अनुपालन का आकलन करने के लिए एक निगरानी तंत्र स्थापित करता है और उल्लंघन के मामले में जवाबी आयात शुल्क लगाने की धमकी देता है।
बयान में कहा गया है, "यह भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का शर्मनाक समर्पण है।"पार्टी ने सरकार की अमेरिका से रक्षा आपूर्ति पर निर्भरता बढ़ाने की प्रतिबद्धता की भी आलोचना की। इसमें कहा गया है कि यह भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक हितों के लिए हानिकारक हो सकता है।
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