नारायणपुर , नवम्बर 11 -- छत्तीसगढ़ के दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में माओवादियों के प्रभाव को खत्म करने और ग्रामीणों तक शासन की मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नारायणपुर पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त टीम ने मंगलवार को माओवादियों के शीर्ष नेताओं के सेफ जोन माने जाने वाले ग्राम तोके में नया "सुरक्षा एवं जनसुविधा कैंप" स्थापित किया। यह कदम माड़ बचाओ अभियान के तहत नक्सलमुक्त और सशक्त बस्तर की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

कैंप के शुभारंभ के दौरान पुलिस अधीक्षक रॉबिनसन गुरिया ने कहा, "तोके में नया कैंप खुलना न केवल सुरक्षा दृष्टि से अहम है, बल्कि यह विकास की नई शुरुआत भी है। इससे ग्रामीणों को भयमुक्त जीवन जीने और शासन की योजनाओं का लाभ लेने का अवसर मिलेगा।" उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष में अबूझमाड़ में यह 15वां सुरक्षा एवं जनसुविधा कैंप है।

कार्यक्रम में आसपास के ग्रामों मुसेर, कोंदाहूर, कोड़ेनार, बुरुम और मापंगल से पहुंचे ग्रामीणों ने नक्सलवाद के खात्मे का संकल्प लिया और पुलिस कैंप की स्थापना पर संतोष जताया। ग्रामीणों ने बिजली, स्वास्थ्य, सड़क और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग रखी, जिस पर प्रशासन ने जल्द समाधान का भरोसा दिया।

पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज ने यूनीवार्ता से कहा, "नवीन कैंपों की स्थापना से सुरक्षा बलों की पहुंच अबूझमाड़ के भीतर तक बनी है। इससे न केवल नक्सली गतिविधियों पर लगाम लगेगी, बल्कि विकास कार्य भी तेज गति से आगे बढ़ेंगे।"जानकारी के अनुसार, डीआरजी, बस्तर फाइटर और बीएसएफ 133वीं एवं 135वीं बटालियन की संयुक्त टीमों ने इस कैंप की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशासन का कहना है कि इन अभियानों के फलस्वरूप वर्ष 2024 से अब तक 208 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि 99 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए और 117 गिरफ्तार किए गए।

क्षेत्र में सड़क, पुल-पुलिया, मोबाइल नेटवर्क और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ अब तोके और आसपास के गांवों में विकास की नई उम्मीद जगी है। नारायणपुर पुलिस का यह प्रयास न केवल अबूझमाड़ में स्थायी शांति की नींव रखता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि शासन की पहुंच अब उन इलाकों तक हो चुकी है, जहां कभी केवल बंदूकों की गूंज सुनाई देती थी।

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