बैतूल , दिसंबर 06 -- ब्लाइंड टी-20 क्रिकेट में भारत को विश्व चैंपियन बनाने वाली विकेटकीपर बल्लेबाज मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की दुर्गा येवले (यादव) की सफलता जितनी चमकदार है, उसके पीछे उतने ही गहरे संघर्ष छिपे हैं।

भैंसदेही के राक्सी गांव की साधारण किसान परिवार में जन्मी दुर्गा आज अंतरराष्ट्रीय पहचान पा चुकी हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था।

दुर्गा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव और बैतूल के ब्लाइंड स्कूल में पूरी की। आगे की उच्च शिक्षा और बेहतर प्रशिक्षण के लिए जब उन्हें इंदौर भेजने की जरूरत पड़ी, तब परिवार की आर्थिक स्थिति सबसे बड़ी दीवार बनकर खड़ी हो गई। इसी समय उनकी मां ने बिना देर किए अपने गहने गिरवी रख दिए, ताकि बेटी के सपने रुक न जाएं। मां के इस त्याग ने ही दुर्गा की किस्मत मोड़ने का काम किया। गहने गिरवी रखने से मिले पैसों से दुर्गा इंदौर के दृष्टिबाधित स्कूल पहुंच सकीं, जहां से उनकी जिंदगी ने नई दिशा पकड़ी।

इंदौर में ही वर्ष 2021 में आयोजित एक कैंप के दौरान उनका चयन जिला स्तरीय टीम में हुआ और यही उनकी असली क्रिकेट यात्रा की शुरुआत थी। जिले से राष्ट्रीय स्तर और फिर विश्व कप टीम तक पहुंचने में दुर्गा ने अपनी लगन, अनुशासन और अदम्य इच्छाशक्ति से हर चुनौती को मात दी।

दुर्गा बताती हैं कि विकेटकीपर के रूप में उनकी जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्हें बी1 और बी2 प्लेयर्स को गेंद की दिशा लगातार बतानी होती है। कई मैचों में उनकी विकेटकीपिंग इतनी शानदार रही कि बल्लेबाजी की बारी तक नहीं आई।

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