रांची , जनवरी 16 -- झारखंड के बोकारो जिले के बेरमो के करगली गेट पर जन नायक महेंद्र सिंह की 21वीं शहादत दिवस पर आज विभिन्न राजनीतिक सामाजिक, विस्थापित जन संगठनों, बुद्धिजीवी और प्रबुद्ध नागरिकों ने जन नायक महेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित किया।
सर्व प्रथम उनके तस्वीर पर माल्यार्पण के पश्चात एक मिनट का मौन धारण श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। भाकपा माले राज्य स्थाई कमेटी सदस्य भुवनेश्वर केवट ने कहा की महेंद्र सिंह जन सवालों, जन संघर्षों और जन आकांक्षाओं को साकार करने के लिए गांव की गलियों से लेकर शहरों की सड़कों से लेकर विधानसभा के सदन तक गरीबों के पक्ष में सबसे मजबूत उठने वाली आवाज नाम महेंद्र सिंह है। जो जेल के बंदियों से लेकर खेत खलिहानों और कारखानों में अपने अधिकार के लिए लड़ने वाले किसानों मजदूरों , युवाओं और विस्थापितों की मुखर आवाज का नाम महेंद्र सिंह है। आदिवासियों दलितों और अल्पसंख्यकों के पक्ष में डटकर खड़े होने वाले शख्सियत का नाम महेंद्र सिंह है। हू इज द महेंद्र सिंह की बात पूछने वाले कि पहचान हत्यारी ताकत के रूप में ही होगी क्योंकि यही बात गोली चलाने के पूर्व हत्यारों ने पूछा था कौन हैं महेंद्र सिंह, महेन्द्र सिंह छुपने और भागने के बजाय साहसिक मुकाबला करते हुए आवाज दिया मैं हूं महेंद्र सिंह। महेंद्र सिंह का जन समर्पण सादगी और संघर्ष ही उनकी पहचान है जो सिर्फ झारखंड ही नहीं देश की राजनीति के आदर्श हैं उनकी प्रेरणा हमेशा राज्य के नव निर्माण के संघर्ष में जिंदा रहेगा।
भाकपा माले के राज्य कमेटी सदस्य विकास कुमार सिंह ने कहा महेंद्र सिंह तोहफों और उपहार का कट्टर विरोधी थे। विधान सभा के बजट सत्रों में विधायकों को भेंट की जाने वाली सिस्टम और भ्रष्टाचार के खिलाफ डटकर खड़े हुए चाहे भ्रष्टाचारी अपने स्व जाति के लोग ही क्यों न हो।
वरिष्ठ पत्रकार राकेश वर्मा ने कहा की महेंद्र सिंह का बेरमो और उसके सेट गांवों के ग्रामीण से जीवंत लगाव था, महेंद्र सिंह मेरे परिवार का भी हिस्सा थे । चलकरी के तीन साथियों की शहादत ने इस इलाके में लाल झंडे को जड़ से मजबूत बना दिया है जो आज तक जिंदा रखा है। ताम झाम और असलहों से घिरे नेताओं से नहीं विकास महेंद्र सिंह जन नेता से शुरू होती है।
सीपीआई के युवा नेता आफताब आलम ने कहा कि बेरमो के धरती की पहचान वामपंथी आंदोलन से रहा है शफीक खान साहब की तरह ही महेंद्र सिंह ने मजदूर आंदोलन को नहीं गति प्रदान किया है इस पहचान को फिर से हासिल करना जरूरी है। पूंजी के हमले के खिलाफ जोरदार विरोध करना ही महेंद्र सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि है।
इंटक के मजदूर नेता वीरेंद्र सिंह ने कहा कि कोयला मजदूरों के आंदोलन को महेंद्र सिंह ने नहीं पहचान दी है। मेरे जैसे मजदूरों को राजनीति की राह में लाने में महेंद्र सिंह की मुख्य भूमिका रही है।
माकपा के वरिष्ठ नेता भागीरथ शर्मा ने कहा कि झारखंड की विधानसभा हो या बिहार की गरीबों के पक्ष की तेज आवाज महेंद्र सिंह से ही गूंजती थी। शोषण मुक्त समाज बनाने के ख्वाहिश और सपने के कारण ही महेंद्र सिंह असली दिशा नहीं भटके जिसके कारण ही उन्हें गोलियों का शिकार होना पड़ा।
महेंद्र सिंह के आंदोलनो के सहयोगी और विस्थापित नेता काशी नाथ केवट ने कहा कि गिरिडीह जेल में 1985 में महेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद ही बेरमो में जन पक्षीय राजनीति की शुरुआत हुई। बेरमो में कई दिग्गज नेताओं के बावजूद भी महेंद्र सिंह की सादगी सरल और सहज व्यवहार के कारण ही गांवो के लोग उन्हें ज्यादा पसंद करते थे और कम समय में ही आईपीएफ इस क्षेत्र की बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी। विस्थापन आंदोलन में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है ।
श्रद्धांजलि संकल्प सभा के बाद पांच सूत्री राजनीतिक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें श्रम कानून को खत्म कर चार लेबर कोड की अधिसूचना लागू करने के खिलाफ आहूत श्रमिक संगठनों की देशव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने, मनरेगा को खत्म कर लाई गई वो बी ग्राम जी योजना को वापस लेने, सोलर पावर प्लांट लगाने के पूर्व विस्थापित गांव में बिजली पानी नौकरी की व्यवस्था करने, किसानों के मांगे पूरी करने के संबंध में किए वायदे पूरा करने, झारखंड समेत देश के जंगलों को अदाणी के लिए उजाड़ने की निंदा की गई।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखण्ड सचिव पंचानन मण्डल और संचालन माले नेता राज केवट ने किया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भाकपा माले नेता बालेश्वर गोप, बैजनाथ सिंह,सीपीआई के सुजीत घोष, माकपा नेता श्यामबिहारी सिंह दिनकर, बालेश्वर यादव, चुनीलाल रजवार कामेश्वर गिरी शीला देवी, कुंती देवी,चुनीलाल केवट नेपाल सिंह आर के दास, रघुवीर राय, डी के मिस्त्री रूपलाल केवट, नारायण केवट, अमित केवट आदि मुख्य रूप से शामिल थे।
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