जयपुर , जनवरी 05 -- यूएन वीमेन कनाडा एनसी की अध्यक्ष (एमेरिटस) और 'अल्मास जिवानी फाउंडेशन' की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अलमास जिवानी ने महिला सशक्तिकरण को वैश्विक आवश्यकता और समृद्ध समाज की नींव बताते हुए कहा है कि आज महिला सशक्तीकरण केवल सामाजिक पहल नहीं बल्कि वैश्विक विकास का अनिवार्य घटक बन चुका है और 'इन्वेस्ट इन वुमेन' केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव परिवार, समाज, शहर और अंततः पूरे राष्ट्र पर पड़ता है।
सुश्री जिवानी ने सोमवार को यहां जेईसीसी, सीतापुरा में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट-2026 के तहतआयोजित 'सामाजिक प्रभाव समाज के विकास के लिए अनिवार्य' सत्र में यह बात कही। इस दौरान सुश्री जिवानी और मैनेजिंग पार्टनर, डलबर्ग जगजीत सरीन द्वारा आर्थिक गतिशीलता, महिला सशक्तीकरण, क्लाइमेट टेक और लैंगिक समानता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब महिलाओं को शिक्षा, अवसर और संसाधन मिलते हैं, तो उसका असर पीढ़ियों तक दिखाई देता है। एक सशक्त महिला सशक्त परिवार का निर्माण करती है, सशक्त परिवार सशक्त शहर बनाते हैं और यही सशक्त शहर मिलकर एक मजबूत, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र की नींव रखते हैं।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण से राष्ट्र की अर्थव्यवस्था, नवाचार क्षमता और सामाजिक स्थिरता को मजबूती मिलती है। समान अवसर, सुरक्षित कार्यस्थल, नेतृत्व में भागीदारी और कौशल विकास महिलाओं को आगे बढ़ने का सशक्त मंच प्रदान करते हैं। इसलिए महिला सशक्तीकरण में निवेश करना वास्तव में राष्ट्र निर्माण में निवेश है।
श्री सरीन ने जलवायु परिवर्तन को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन आज भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर हर व्यवसाय और उद्योग को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए एंटरप्रेन्योर समुदाय से आगे आने का आह्वान किया और कहा कि देश में 'क्लाइमेट फॉर्च्यून' लाने का यह उपयुक्त समय है।
उन्होंने बताया कि क्लाइमेट टेक्नोलॉजी के माध्यम से सरकार बड़े पैमाने पर ग्रीन पार्क, सोलर पार्क और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को प्रोत्साहित कर रही है, जिनमें हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे उद्यमियों के लिए व्यापक संभावनाओं के द्वार भी खुलते हैं। ग्रीन एनर्जी, क्लीन टेक और सस्टेनेबल इनोवेशन के क्षेत्र में नवाचार करने वाले उद्यमी देश की आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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