भोपाल , दिसंबर 3 -- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की गतिविधियां बच्चों और महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक सुगमता से पहुंचे और कार्यक्रम क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा और उद्योग विभाग के साथ समन्वय कर गतिविधियां संचालित करने पर जोर दिया।
मंत्रालय में हुई समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, मुख्य सचिव अनुराग जैन और विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियों तथा नवाचारों का प्रस्तुतीकरण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना अत्यंत महत्वपूर्ण है और किसी भी चरण पर बेटियों का ड्रॉप आउट नहीं होना चाहिए। ड्रॉप आउट मामलों पर सख्ती से निगरानी रखकर तुरंत निराकरण के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं और बच्चों की योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने जिला स्तरीय नवाचारों का अध्ययन कर उनकी उपयुक्तता के आधार पर अन्य जिलों में विस्तार के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि पीएम जनमन योजना के भवन डिज़ाइन और ऑनलाइन मॉनिटरिंग मॉड्यूल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है और प्रदेश को 704 आंगनवाड़ी भवनों की सर्वाधिक स्वीकृति प्रदान की गई है। झाबुआ जिले के "मोटी आई" नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
विभाग ने बताया कि मध्यप्रदेश आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूर्णत: ऑनलाइन पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। टेक होम राशन की फेस रिकग्निशन प्रक्रिया में भी प्रदेश प्रथम स्थान पर रहा। स्पॉन्सरशिप योजना में 20 हजार से अधिक बच्चों को लाभ दिया गया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराई गई और लाड़ली बहना योजना में जनवरी 2024 से नवंबर 2025 तक 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरण की गई।
जिलों में संचालित नवाचारों में डिंडौरी का रेवा प्रोजेक्ट, अशोकनगर का हृदय अभियान, देवास का किलकारी अभियान, नीमच में 'हमारी आंगनवाड़ी' और दतिया का 'मेरा बच्चा' अभियान शामिल हैं, जिनके माध्यम से बच्चों के पोषण सुधार और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बैठक में आगामी तीन वर्षों की कार्य योजना पर भी चर्चा की गई। इसमें 2026 से शहरी आंगनवाड़ियों में सेंट्रल किचन से गर्म भोजन की व्यवस्था, शाला पूर्व शिक्षा की गुणवत्ता वृद्धि, 34 लाख से अधिक लाड़ली लक्ष्मी बालिकाओं को छात्रवृत्ति भुगतान, 9 हजार नए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण और महिला सशक्तिकरण संबंधी जागरूकता गतिविधियों का विस्तार शामिल है।
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