नैनीताल , मार्च 24 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश में महिला कॉलेजों को भूमि पर दी जाने वाली 50 प्रतिशत छूट के मामले में दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सचिव उच्च शिक्षा को निर्देशित किया है कि निदेशक उच्च शिक्षा द्वारा भेजे गए पत्रों पर आठ सप्ताह के अंदर निर्णय लें।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि पूर्व में निदेशक उच्च शिक्षा ने दो बार सचिव उच्च शिक्षा को पत्र भेजकर अवगत कराया था कि महिला कॉलेज खोलने के लिए भूमि पर मिलने वाली 50 प्रतिशत छूट वर्तमान में नहीं दी जा रही है। इससे नए कॉलेज खोलने में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।

याचिका में यह भी कहा गया कि यह नियमावली मूल रूप से उत्तर प्रदेश सरकार से अधिकृत है और समय-समय पर इसमें प्रदेश सरकार की ओर से संशोधन भी हुए हैं, लेकिन इस महत्वपूर्ण प्रावधान पर अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में यह प्रावधान अभी भी मौजूद है।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि यह मामला विचाराधीन है और इस पर निर्णय की प्रक्रिया जारी है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए सचिव उच्च शिक्षा को स्पष्ट निर्देश दिए कि निदेशक उच्च शिक्षा के पत्रों पर निर्धारित अवधि में अंतिम निर्णय लिया जाए।

मामले के अनुसार रायवाला निवासी सुरवीर सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि भूमि छूट को लेकर स्पष्टता न होने के कारण नए महिला कॉलेज नहीं खुल पा रहे हैं।

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