रांची , अप्रैल 18 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने महिलाओं से जुड़े 33% आरक्षण बिल पारित नहीं हो पाने पर गहरी नाराजगी जताई है।

श्री मरांडी ने आज अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह दिन लोकतंत्र और संसदीय इतिहास के लिए "काला अध्याय" बनकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधेयक का गिरना नहीं, बल्कि उन उम्मीदों का टूटना है जो देश की महिलाओं ने समान भागीदारी वाले भविष्य के लिए संजोई थीं।

श्री मरांडी ने कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने से जुड़े नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए आवश्यक संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 का पारित न हो पाना देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों की आकांक्षाओं पर आघात है।

श्री मरांडी ने कहा कि दशकों से महिलाएं राजनीति और नीति-निर्माण में समान भागीदारी की प्रतीक्षा कर रही हैं। ऐसे में जब यह अवसर सामने आया, तब कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और समाजवादी पार्टी जैसे दलों द्वारा इसका विरोध किया जाना और विधेयक के पारित न होने पर खुशी जताना उनकी महिला विरोधी सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 के आम चुनाव में देश की नारी शक्ति इसका जवाब देगी।

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