जयपुर , जनवरी 24 -- राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने शनिवार को कहा कि महिलाओं को पुरुषों से तीन गुना अधिक मेहनत करने पर राजनीति में स्थान मिलता है।
श्रीमती राजे ने आज यहां कॉन्सिट्यूशन क्लब में आयोजित जाट महिला शक्ति संगम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के समय भारत में महिलाओं की साक्षरता दर नौ प्रतिशत थी और आज 65 प्रतिशत है। देश के आम चुनावों में चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या 10 प्रतिशत है जबकि 1957 में सिर्फ तीन प्रतिशत ही थी। महिला सांसदों की संख्या पहली लोकसभा में 22 थी आज 74 है। राज्यसभा में 1952 में महिला सदस्यों की संख्या 15 थी, आज 42 हो गई लेकिन यह संख्या पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह संख्या पुरुषों के बराबर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सिद्ध कर दिया कि शिक्षा सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि इसी तरह डॉ कमला बेनीवाल, हेमा मालिनी, श्रीमती सुमित्रा सिंह, डॉ प्रियंका चौधरी, रीटा चौधरी, डॉ शिखा मील और श्रीमती सुशीला बराला, पद्मश्री से सम्मानित कृष्णा पूनिया, श्रीमती कमला कस्वां और दिव्या मदेरणा ने राजनीति के क्षेत्र में नाम किया है।
इस अवसर पर जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील ने कहा कि जाट आरक्षण श्रीमती राजे ने बचाया और धौलपुर और भरतपुर के जाटों को आरक्षण भी वसुन्धरा राजे ने दिलवाया। डॉ. शिखा मील, श्रीमती कृष्णा पूनियां एवं पूर्व न्यायाधीश डॉ राजेंद्र चौधरी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
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