मुंबई , फरवरी 12 -- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सूत्रों के अनुसार पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष शरद पवार को दिवंगत अजीत पवार के नेतृत्व वाली राकांपा और उनके(शरद पवार) नेतृत्व वाली राकांपा के एकीकरण के मार्ग में एक "बाधा" के रूप में देखा जा रहा है।

दिन में शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने कहा, "हम जल्द ही दोनों राकांपा गुटों के विलय के संबंध में एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित करेंगे। विलय की घोषणा 12 फरवरी (गुरुवार) को होनी थी। मैं आज प्रेस वार्ता करने वाला था, लेकिन अब यह 16 या 17 फरवरी को मुंबई में आयोजित की जाएगी।"सूत्रों के मुताबिक श्री अजीत पवार गुट के भीतर भी मोटे तौर पर दो धड़े हैं। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व वाला एक धड़ा भाजपा समर्थक है, जो चाहता है कि श्री शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा का विलय अजीत पवार गुट में उन शर्तों पर हो जो भाजपा और मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन सरकार के अनुकूल हों। वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे ने बुधवार को खुलकर यह विचार व्यक्त किया।

वहीं दूसरी ओर अजीत पवार गुट के अन्य नेता जैसे अमोल मिटकरी और प्रमोद हिंदुराव भाजपा को लाभ पहुंचाने वाले विलय के विचार के प्रति अधिक उत्साहित नहीं हैं। ये नेता अपने दिवंगत नेता अजीत पवार की 28 जनवरी को हुई विमान दुर्घटना में मृत्यु के बारे में खुलासे कर रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार (दिवंगत अजीत पवार की पत्नी) वरिष्ठ नेताओं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के प्रभाव में हैं, जो भाजपा के करीबी माने जाते हैं।

सूत्रों का कहना है कि उपमुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हालिया बैठक ने मामलों को और अधिक जटिल बना दिया है। चूंकि यह निश्चित है कि वह अपने दिवंगत पति के स्थान पर पार्टी प्रमुख बनेंगी, इसलिए अन्य नेताओं के पास उनके आदेशों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।

प्रधानमंत्री के साथ सुश्री सुनेत्रा पवार की बैठक लगभग 40 मिनट तक चली, जिसमें राकांपा के अधूरे विलय और दिवंगत अजीत पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के नये अध्यक्ष के चुनाव सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

सूत्रों का कहना है कि अजीत पवार गुट के शीर्ष नेताओं ने दोनों दलों के विलय में कई कठिनाइयों के होने के बारे में विचार व्यक्त किये। उनका मानना है कि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि विलय के बाद राकांपा संस्थापक श्री शरद पवार को नियंत्रित करना लगभग असंभव होगा और उनकी भूमिका एक बड़ी समस्या बन सकती है।

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