नागपुर , दिसंबर 10 -- महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये का मासिक वजीफा प्रदान करने वाली कल्याणकारी योजना 'लाडकी बहन योजना' के अंतर्गत लगभग 35 करोड़ रुपये का लाभ लेने वाले अपात्र लाभार्थियों से यह धनराशि वसूली जायेगी।

विधान परिषद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 14.5 करोड़ रुपये के लाभ प्राप्त करने वालों में 1,526 सरकारी कर्मचारी शामिल थे। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि अधिकारियों ने 14,298 ऐसे पुरुषों की भी पहचान की है जिन्होंने अपात्र होने के बावजूद लाभ प्राप्त किया।

सरकार ने अवैध रूप से यह लाभ प्राप्त करने वाले सभी पुरुषों एवं सरकारी कर्मचारियों से वसूली की कार्यवाही शुरू करने का निर्णय लिया है। विभागों को महाराष्ट्र सिविल सेवा नियमों के अंतर्गत धनराशि की वसूली के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।

इस वर्ष की शुरुआत में, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी विभाग के नेतृत्व में हुई जांच में 26.3 लाख खातों को संभावित रूप से अपात्र घोषित किया गया था। अनियमितताओं में दो से अधिक सदस्यों द्वारा लाभ प्राप्त करने वाले परिवार, कई योजनाओं के अंतर्गत सहायता प्राप्त करने वाले व्यक्ति और ऐसे मामले शामिल थे जहां पुरुषों ने इस लाभ के लिए आवेदन किया था। जून से सभी संदिग्ध खातों में भुगतान अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।

'लाडकी बहन योजना' में 21 से 65 वर्ष की विवाहित, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्त और निर्धन महिलाएं शामिल हैं, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। पात्र परिवारों में से एक अविवाहित महिला भी इस योजना का लाभ उठा सकती है। लाभार्थियों को अन्य योजनाओं से सहायता प्राप्त करने की अनुमति तभी है जब कुल मासिक सहायता राशि 1,500 रुपये से अधिक न हो।

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