नागपुर , दिसंबर 10 -- महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना (यूबीटी) के विधायक भास्कर जाधव ने बुधवार को मंत्रियों की बार-बार गैरमौजूदगी और इस साल मानसून से हुए नुकसान से संबंधित ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान आधिकारिक जवाब न मिलने पर कड़ा विरोध जताया है।

राज्य में बारिश से हुये नुकसान से संबंधित और दूसरा नासिक और जायकवाड़ी बांध से गोदावरी नदी में पानी छोड़े जाने से हुए नुकसान से संबंधित प्रस्तावों पर सदन में चर्चा की जानी थी । श्री जाधव ने चर्चा की शुरुआत में मंत्रियों की "नियमित रूप से अनुपस्थिति" की आलोचना की और इस बात पर जोर दिया कि सदस्यों को पहले से जवाब लिखित रूप से उपलब्ध नहीं कराये गये थे।

श्री जाधव ने सत्ता पक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा "यह अध्यक्ष का अपमान है। अगर मंत्री सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हो सकते हैं, तो पहले से सूचना दी जानी चाहिए। आजकल कोई सूचना नहीं दी जाती है। यह क्या हो रहा है।" उन्होंने बताया कि भारी बारिश से 29 जिले और 300 से ज़्यादा तालुका प्रभावित हुए हैं, जिससे 65 लाख से ज़्यादा किसान प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा "बाढ़ के कारण भूमि कटाव काफी हुआ है। बार-बार अनुरोध के बावजूद प्रभावित किसानों को ज़रूरी मुआवज़ा देने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गयी है।" श्री जाधव ने सुधीर मुनगंटीवार (भाजपा), नरेंद्र भोंडेकर (शिवसेना) और जितेंद्र आव्हाड (एनसीपी-एसपी) के साथ इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की थी। लेकिन जब प्रस्ताव लाया गया तो सदस्यों को सरकार के जवाब की प्रतियां नहीं मिलने पर श्री जाधव ने कड़ा विरोध जताया।

सत्र के दौरान नासिक और जायकवाड़ी बांधों से ज़्यादा पानी छोड़े जाने से हुए नुकसान के संबंध में विधायकों विजयसिंह पंडित (एनसीपी) और हिकमत उधान (शिवसेना) द्वारा पेश एक और प्रस्ताव भी आया। राहत और पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने कहा कि मामला जल संसाधन विभाग को भेजा गया है, लेकिन उस विभाग के मंत्री, राधाकृष्ण विखे पाटिल अनुपस्थित थे। निचले सदन के पीठासीन अधिकारी समीर कुनवार ने घोषणा की कि अब चर्चा गुरुवार को होगी।

श्री जाधव ने इन मामले में जवाबों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुये कहा कि वरिष्ठ सदस्यों के प्रस्तावों को सदन के नियमित कामकाज का हिस्सा माना जाना चाहिए। उन्होंने पूछा, ''जब हम सुबह के विशेष सत्र के लिए सहमत होते हैं, तब भी जवाब नहीं मिलते। अधिकारी इतने लापरवाह कैसे हो गए हैं। क्या वे सदन को हल्के में ले रहे हैं।'' उन्होंने अध्यक्ष से सख्त कार्रवाई करने की अपील की।

श्री पाटिल ने बताया कि उन्हें जवाब मिल गया था, लेकिन उन्हें नहीं पता कि दूसरे सदस्यों को क्यों नहीं मिला। विपक्षी विधायकों ने उनके स्पष्टीकरण को कार्यवाही में देरी करने की कोशिश बताया।

सदन में जब गोदावरी नदी को हुए नुकसान से जुड़े दूसरे नोटिस पर चर्चा हुई और विखे पाटिल गैर-मौजूद रहे तो तनाव और बढ़ गया। उद्योग मंत्री उदय सामंत ने प्रक्रियागत मुद्दों को स्वीकार करते हुए कहा, ''हमें कभी-कभी नोटिस दोपहर एक या 1:30 बजे मिलते हैं और तैयारी के लिए समय चाहिए होता है। कभी-कभी, नोटिस आधी रात को ही आते हैं।''बाद में श्री कुनवार ने कहा कि बारिश से हुए नुकसान से जुड़े दोनों नोटिस पर गुरुवार को चर्चा की जायेगी। श्री जाधव ने इससे पहले इस बात पर ज़ोर दिया कि अध्यक्ष को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

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