नागपुर , नवंबर 04 -- महाराष्ट्र के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से बाह्य रोगी सेवाएँ (ओपीडी) बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और मरीज़ों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह हड़ताल फलटन के एक उप-ज़िला अस्पताल में एक महिला डॉक्टर की कथित आत्महत्या के विरोध में की गयी है।
नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल(जीएमसी) में ओपीडी सेवाएँ काफी हद तक बंद रहीं, केवल आपातकालीन, आपातकालीन और गहन चिकित्सा इकाइयाँ ही सामान्य रूप से चल रही थीं।
जीएमसी नागपुर में मंगलवार को शांतिपूर्ण मार्च का आयोजन किया गया है, जहाँ लगभग 700 से 1,000 डॉक्टर ओपीडी परिसर से परिसर स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तक पैदल मार्च करेंगे और चिकित्सा पेशेवरों के लिए न्याय, सम्मान और सुरक्षा की माँग करेंगे।
इस हड़ृताल का नेतृत्व महाराष्ट्र रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (एमएआरडी) कर रहा है, जिसने राज्य सरकार पर डॉक्टरों की सुरक्षा में सुधार और फलटन घटना की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) बनाने के बार-बार किए गए अनुरोधों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
एमएआरडी के राज्य महासचिव डॉ. सुयश धवने ने कहा कि ओपीडी कार्य रोकने का निर्णय सरकार द्वारा विशेष जाँच दल गठित करने या स्थायी सुरक्षा उपायों के बारे में कोई आश्वासन न देने के बाद लिया गया है।
जीएमसी नागपुर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अविनाश गवांडे ने कहा कि सीमित ओपीडी संचालन को बनाए रखने में मदद के लिए गैर-रेजीडेंट डॉक्टरों को बुलाया गया था।
इस बीच, यवतमाल स्थित वसंतराव नाइक सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर भी प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं, जिससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर और दबाव बढ़ गया है।
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