नयी दिल्ली/मुंबई , मार्च 01 -- महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में चार दिवसीय (25 से 28 फरवरी तक) राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का सफल समापन हुआ। आयुष मंत्रालय द्वारा अखिल भारतीय आयुर्वेदिक कांग्रेस के सहयोग से आयोजित इस मेले ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण सशक्तिकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।

मेले का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संत गजानन महाराज संस्थान के विसावा मैदान में किया। श्रीमती मुर्मू ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य को सर्वोच्च सुख बताते हुए कहा कि आयुष प्रणालियां तन-मन के संतुलन पर आधारित जीवनशैली को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने निवारक और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व पर बल दिया तथा आयुर्वेद में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चिकित्सकों को 'आजीवन आयुर्वेदिक गौरव सम्मान' से सम्मानित किया।

महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आयुर्वेद को भारत की शाश्वत वैज्ञानिक परंपरा बताते हुए दवाओं और उपचार में गुणवत्ता व प्रामाणिकता पर जोर दिया।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने मेले को "भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का महाकुंभ" बताते हुए कहा कि आयुष न केवल उपचार पद्धति है, बल्कि निवारक स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण समृद्धि और वैश्विक नेतृत्व का आधार भी है।

मेले में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी की निःशुल्क ओपीडी सेवाएं प्रदान की गईं। हजारों लोगों ने स्वास्थ्य जांच, परामर्श और प्रामाणिक आयुष औषधियों का लाभ उठाया। योग सत्रों और प्रतियोगिताओं में युवाओं और छात्रों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जो निवारक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता का संकेत है।

किसानों के लिए आयोजित सत्र मेले का विशेष आकर्षण रहा जिसमें 'आयुर्वेदिक खेती: उत्पादन, मूल्यवर्धन और विपणन' विषय पर लगभग 2000 किसानों को औषधीय पौधों की खेती और बाजार संपर्क पर मार्गदर्शन दिया गया। हल्दी की खरीद के लिए वापसी खरीद समझौते सहित कई आशय पत्रों पर हस्ताक्षर हुए, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया।

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