भीलवाड़ा , फरवरी 26 -- राजस्थान में धर्मनगरी भीलवाड़ा में हरी सेवा धाम में आयोजित 'सनातन मंगल महोत्सव' का समापन गुरुवार को तीन युवाओंकी भव्य संत दीक्षा और देशभर से जुटे महापुरुषों के ओजस्वी विचारों के साथ हुआ।

वैदिक मंत्रोच्चार और 'हर-हर महादेव' के उद्घोष के बीच जब तीन मुमुक्षु युवाओं ने सांसारिक जीवन त्याग कर भगवा धारण किया, तो पूरा पंडाल आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।

महोत्सव के अंतिम दिन वैदिक रीति-नीति से हुए दीक्षा संस्कार के पश्चात नवदीक्षित संतों का नामकरण किया गया। इंद्रदेव को संत ईशान राम, कुणाल को संत केशव राम और सिद्धार्थ को संत सूयज्ञ राम उदासी के रूप में नया आध्यात्मिक जीवन प्राप्त हुआ। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराज महाराज ने इन तीनों संतों का अभिनंदन करते हुए कहा कि संत परंपरा केवल लेने की नहीं, बल्कि समाज को सर्वस्व देने की परंपरा है। उन्होंने भीलवाड़ा की धरा से फहराई गई सनातन ध्वजा को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

समारोह के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहनलाल यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय सनातन के गौरव को पुनर्स्थापित करने का है। उन्होंने एक दिलचस्प भाषाई मेल बताते हुए कहा, " राज से राजस्थान और 'म' से मध्य प्रदेश मिलकर ही"राम' बनता है।" उन्होंने कहा कि जिस प्रकार 500 वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या का धाम आलोकित हुआ है, उसी तरह मथुरा में भी श्रीकृष्ण धाम विश्व पटल पर नयी पहचान बनाएगा।

डॉ. यादव ने मध्य प्रदेश में श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने और 2028 के उज्जैन महाकुंभ के लिए सभी को आमंत्रित किया।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेश नाथ, राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम दक और भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल सहित कई गणमान्य जन मौजूद रहे।

कार्यक्रम में कासनिक पीठाधीश्वर गुरु शरणानंद महाराज, डॉ. श्याम सुंदर पाराशर, शांतानंद महाराज और विवेकानंद महाराज सहित देशभर के सैकड़ों प्रतिष्ठित संतों ने शिरकत की। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सनातन केवल एक आस्था नहीं, अपितु एक संस्कारित जीवन पद्धति है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सबका दायित्व है।

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