रायपुर , जनवरी 13 -- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क महादेव ऑनलाइन बुक (एमओबी) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए 21.45 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। यह कार्रवाई ईडी रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा धन शोधन जांच के तहत की गई है। जिसकी जानकारी आज मीडिया को दी गयी ।
ईडी के अनुसार, जब्त संपत्तियों में करीब 98.55 लाख रुपये की चल संपत्ति और भारत व दुबई में स्थित 27 अचल संपत्तियां शामिल हैं। इनमें आवासीय मकान, व्यावसायिक परिसर, कृषि भूमि और लग्जरी अपार्टमेंट प्रमुख हैं।
मुख्य प्रमोटर और सहयोगियों की संपत्तियां कार्रवाई के दायरे में ईडी ने बताया कि इस कार्रवाई में महादेव ऑनलाइन बुक के फरार मुख्य प्रमोटर रवि उप्पल की दुबई स्थित लगभग 6.75 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को अटैच किया गया है।
इसके अलावा सट्टेबाजी नेटवर्क के एक अन्य प्रमुख चेहरे सौरभ चंद्राकर के करीबी सहयोगी रजत कुमार सिंह की भिलाई और दुबई स्थित संपत्तियां भी जब्त की गई हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, रजत सिंह पर 15 से 20 करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित करने का आरोप है।
ईडी ने सौरभ आहूजा और विशाल रमानी की दुर्ग और भिलाई स्थित संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है। दोनों पर करीब 100 सट्टा पैनल संचालित कर लगभग 30 करोड़ रुपये की अवैध कमाई करने का आरोप है।
कार्रवाई के तहत विनय कुमार और हनी सिंह की जयपुर व नई दिल्ली स्थित आवासीय संपत्तियों के साथ-साथ महिंद्रा थार और टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसे लग्जरी वाहन भी अटैच किए गए हैं। दोनों पर करीब 7 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का आरोप है।
वहीं, लकी गोयल की राजस्थान स्थित दुकानें और प्लॉट भी जांच के घेरे में आए हैं। उस पर टेलीग्राम के माध्यम से सट्टेबाजी के प्रचार से करीब 2.55 करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित करने का आरोप है। इसके अलावा दुबई स्थित ऑपरेटर राजा गुप्ता की रायपुर की एक अचल संपत्ति को भी अटैच किया गया है।
ईडी की जांच में सामने आया है कि यह अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क टाइगर एक्सचेंज, गोल्ड365 और लेजर 247 जैसे डोमेन के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। नेटवर्क फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम करता था, जिसमें स्थानीय स्तर पर पैनल ऑपरेटर नियुक्त किए जाते थे, जबकि मुख्य संचालन दुबई से सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल द्वारा किया जाता था। जांच में यह भी उजागर हुआ कि कुल मुनाफे का 70 से 75 प्रतिशत हिस्सा प्रमोटरों तक पहुंचता था।
ईडी के अनुसार, सट्टेबाजी से अर्जित धन को हजारों फर्जी और डमी बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया जाता था, जिनके लिए आम लोगों के केवाईसी दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया।
अब तक इस मामले में देशभर में 175 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की जा चुकी है। कार्रवाई के दौरान करीब 2,621 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां जब्त, फ्रीज या अटैच की गई हैं।
ईडी ने अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और पांच अभियोजन शिकायतों में 74 संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी के अनुसार, जांच अभी जारी है और आगे और भी खुलासे संभव हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित