श्रीनगर , जनवरी 09 -- जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (एसएमवीडीआईएमई) की मान्यता रद्द होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि यह कदम एक "खतरनाक मिसाल" कायम कर सकता है।

सुश्री महबूबा ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (एनएमसी) द्वारा कॉलेज की अनुमति रद्द करने का निर्णय, मुस्लिम बहुल राज्य की जनता का भारत में शामिल होने के ऐतिहासिक निर्णय का खंडन करता है।

श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "यह सिर्फ एक कॉलेज की बात नहीं है बल्कि यह एक पैटर्न बन सकता है। जम्मू-कश्मीर हमेशा से ही प्रयोग का मैदान रहा है और यहां जो भी प्रयोग किया जाता है उसे अंततः देश के बाकी हिस्सों में भी लागू किया जाता है।"संस्थान ने नीट परीक्षा में उनके प्रदर्शन के आधार पर एमबीबीएस पाठ्यक्रम में 50 छात्रों को प्रवेश दिया था। अधिकारियों के अनुसार, नामांकित छात्रों में से 42 कश्मीर से थे और मुस्लिम समुदाय से थे।

जहां भारतीय जनता पार्टी ने एनएमसी के फैसले का स्वागत किया, वहीं कश्मीर के कई राजनीतिक नेताओं ने इसे शिक्षा का सांप्रदायिकरण करार दिया। सुश्री महबूबा ने कहा कि बंद करने का आदेश मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की टिप्पणियों के बाद आया है।

उन्होंने पूछा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि उमर साहब ने कॉलेज बंद करने का संकेत दिया और अगले ही दिन आदेश जारी कर दिया गया। क्या उस शाम मुख्यमंत्री से इस बारे में चर्चा हुई थी?" उन्होंने चेतावनी दी कि धर्म के नाम पर शिक्षा का राजनीतिकरण करने से पूरे देश पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा, "अगर इस तरह की कार्रवाई दूसरे राज्यों में भी दोहराई जाती हैं और जम्मू-कश्मीर के युवाओं को अपने ही राज्य में जगह नहीं मिलती, तो वे हरियाणा, पंजाब या कहीं और कैसे सुरक्षित महसूस कर सकते हैं?" उन्होंने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर के लाखों छात्र वर्तमान में केंद्र शासित प्रदेश से बाहर पढ़ाई कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सांप्रदायिक ताकतों के दबाव में यह फैसला लिया गया है और चेतावनी दी कि इससे भारत के अन्य हिस्सों में भी ऐसे ही तत्वों को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने कहा, "अगर जम्मू में भाजपा या आरएसएस के तत्व कुछ दिनों तक विरोध प्रदर्शन करके व्यवस्था पर दबाव डालते हैं और कॉलेज बंद करने जैसा बड़ा फैसला लिया जाता है, तो यह बहुत खतरनाक संदेश देगा। इससे सांप्रदायिक ताकतों को कश्मीरी छात्रों को निशाना बनाने का प्रोत्साहन मिलेगा।" उन्होंने आगे कहा कि कॉलेज का पंजीकरण रद्द नहीं करना चाहिए था।

उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाने का आग्रह किया क्योंकि सांप्रदायिक ताकतें इससे उत्साहित होंगी और यह सिलसिला अन्य जगहों पर भी दोहराया जा सकता है। कोलकाता में गुरुवार को ईडी की छापेमारी के बारे में पूछे जाने पर सुश्री महबूबा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शेरनी बताते हुए कहा कि वह बहुत बहादुर हैं और हार नहीं मानेंगी।

सुश्री महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सीआईके, ईडी और एनआईए जैसी विभिन्न एजेंसियों द्वारा इस तरह की छापेमारी एक आम बात हो गई है और अब पूरा देश इसका खामियाजा भुगत रहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित