नयी दिल्ली , मार्च 26 -- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि दुर्लभ और महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भारत महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को बढ़ावा देगा और एक मजबूत घरेलू मूल्य शृंखला निर्मित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

डॉ. सिंह ने राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास न्यास' (एनएमईटी) की शासी निकाय की बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज की प्रगति की समीक्षा की तथा इस काम में स्टार्टअप्स की भागीदारी तथा मजबूत घरेलू आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण पर बल दिया। बैठक की सह-अध्यक्षता कोयला एवं खान मंत्री तथा एनएमईटी की शासी निकाय के अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी ने की। इसमें खान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, सीएसआईआर-खनिज एवं पदार्थ प्रौद्योगिकी संस्थान (सी एस आई आर -आई एम एम टी) के निदेशक, परमाणु खनिज महानिदेशालय के निदेशक, परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रतिनिधियों, अन्वेषण एजेंसियों के अधिकारियों तथा राजस्थान, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार डॉ सिंह ने कहा कि खनिज क्षेत्र की उन्नति में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद-आईएमएमटी तथा परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) जैसे वैज्ञानिक संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राजधानी के जीपीओए कॉम्प्लेक्स में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि भारत महत्वपूर्ण खनिजों का पता लगाने की गति बढ़ाने, स्टार्टअप-आधारित खनन पारिस्थितिकी विकसित करने तथा आयात निर्भरता को कम करने के लिए मजबूत घरेलू मूल्य शृंखलाओं के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। उन्होंने खनिजों की खोज में तेजी लाने, घरेलू क्षमताओं को सुदृढ़ करने तथा महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।

डॉ. ने कहा कि लिथियम तथा अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का पता लगाए जाने की प्रक्रिया को तेज किए जाने की आवश्यकता है जो आवश्यक रूप से उभरती वैश्विक मांग और भारत की सामरिक आवश्यकताओं के अनुरूप हो। उन्होंने राजस्थान के सिवाना बेल्ट तथा जम्मू और कश्मीर के सलाल-हैमना ब्लॉक जैसे क्षेत्रों में चल रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए अधिक संभावनाशील क्षेत्रों में स्वदेशी अन्वेषण प्रयासों के विस्तार का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत को खनन एवं महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स के प्रवेश हेतु अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा। स्टार्टअप को संस्थागत समर्थन, निर्धारित प्रोत्साहन तथा हैंडहोल्डिंग तंत्र उपलब्ध कराकर खनन प्रौद्योगिकियों और अन्वेषण विधियों में नवाचार को बढ़ावा दिया जा सकता है।

मंत्री ने कहा कि खनिजों के अन्वेषण और दोहन क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास के लिए निजी अन्वेषण एजेंसियों की क्षमता निर्माण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अन्वेषण गतिविधियों की गति बनाए रखने के लिए त्वरित स्वीकृतियां, बेहतर खरीद प्रणाली तथा अन्वेषण के लिए समयबद्ध पूर्व-अनुमतियां आवश्यक हैं।

बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन सहित शुरुआत से अंत तक की एक सशक्त घरेलू आपूर्ति शृंखला विकसित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा गुजरात जैसे राज्यों में प्रसंस्करण क्षमताएं स्थापित करने के लिए चल रहे प्रयासों की जानकारी दी गयी।

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