देहरादून , जनवरी 08 -- उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कुशल चिकित्सकों ने एक रोगी के हृदय के वाल्वो की लीकेज का बिना सर्जरी उपचार कर अपनी योग्यता साबित कर एक बार फिर से सफलता हासिल की है।

गुरुवार को एम्स के कार्डियोलाॅजिस्ट एडिशनल प्रो. डाॅ. बरूण कुमार ने बताया कि 65 वर्षीय रोगी के हृदय के माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज होने के साथ ही उनके हृदय की पम्पिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी। जबकि सामान्य तौर पर यह 60 प्रतिशत रहती है। उन्होंने बताया कि 'इन्टरवेंशनल' तरीके से इलाज की यह प्रक्रिया बिना सर्जरी के की गयी। इस प्रक्रिया में ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (टी.ई.ई.आर) तकनीक का इस्तेमाल किया गया और माइक्लिप डिवाइस की सहायता से इसे सफलतापूर्वक लीकेज को बंद किया गया।

प्रो. वरुण ने बताया कि टीम में उनके अलावा, कार्डियोलाॅजिस्ट डाॅ. सुवेन कुमार, सीटीवीएस विभाग के वरिष्ठ सर्जन डाॅ. अंशुमान दरबारी, एनेस्थेसिया के डाॅ. अजय कुमार सहित अन्य चिकित्सक शामिल थे।

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